बंगाल की बिसात: बोस का इस्तीफा और रवि की एंट्री, ममता बोली-केंद्र ने तोड़ी परंपरा

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे और उसके तुरंत बाद आरएन रवि की नियुक्ति ने राज्य सरकार और केंद्र के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को केंद्र की ‘साजिश’ करार देते हुए तीखे सवाल दागे हैं।

गृह मंत्रालय के दबाव में हुआ इस्तीफा’
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आशंका जताई है कि सीवी आनंद बोस का इस्तीफा स्वैच्छिक नहीं, बल्कि दबाव का परिणाम है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर इशारा करते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार राजभवन पर नियंत्रण चाहती है। यह इस्तीफा गृह मंत्रालय के भारी दबाव में लिया गया फैसला लगता है।

नई नियुक्ति पर तकरार: ‘परंपराओं की बलि दी गई’
आरएन रवि को बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर ममता बनर्जी ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताते हुए मुख्य रूप से दो बातें कही हैं।

परामर्श का अभाव: स्थापित परंपरा के अनुसार, राज्यपाल की नियुक्ति से पहले मुख्यमंत्री से चर्चा की जाती है, लेकिन इस बार इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

संघवाद पर प्रहार: ममता बनर्जी ने इसे ‘सहकारी संघवाद’ की हत्या करार देते हुए कहा कि केंद्र एकतरफा फैसले लेकर संघीय ढांचे को कमजोर कर रहा है।

विवाद का केंद्र: क्या है ममता की नाराजगी की वजह?
ममता बनर्जी का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले एक ऐसे चेहरे को राज्यपाल बनाना, जिससे राज्य सरकार की राय न ली गई हो, प्रशासनिक कामकाज में बाधा डालने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजभवन को राजनीतिक अखाड़ा बनाना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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