डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड हाईकोर्ट ने कोल्हान क्षेत्र के हजारों बिजली उपभोक्ताओं को नए साल का बड़ा तोहफा दिया है। कोर्ट ने झारखंड इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी (संशोधन) अधिनियम 2021 को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया है। इस फैसले से टाटा स्टील और टाटा स्टील यूआईएसएल (पहले जुस्को) के करीब 60 हजार उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
झारखंड सरकार ने साल 2021 में बिजली शुल्क (इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी) के नियमों में बदलाव किया था। इसके तहत टाटा स्टील और यूआईएसएल अपने उपभोक्ताओं से अतिरिक्त ड्यूटी वसूल रहे थे। हाईकोर्ट ने माना कि नेट एनर्जी चार्ज पर इस तरह की वसूली से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था।
कैसे मिलेगा रिफंड?
अदालत ने आदेश दिया है कि साल 2021 के बाद से अब तक उपभोक्ताओं से जितनी भी इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूली गई है, उसे वापस किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वसूली गई राशि को बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं के आगामी बिलों में एडजस्ट करें। बिजली कंपनियां यह पैसा उपभोक्ताओं को लौटाएंगी और राज्य सरकार कंपनियों को यह राशि वापस करेगी।
कौन-कौन होगा लाभान्वित?
इस फैसले का सीधा असर जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां (आदित्यपुर समेत) के बिजली बिलों पर पड़ेगा।
कुल लाभार्थी: 60,000 से अधिक उपभोक्ता।
टाटा स्टील के ग्राहक: लगभग 52,539 (जिसमें 40,556 घरेलू और करीब 11,000 कमर्शियल शामिल हैं)।
UISL के ग्राहक: सरायकेला जिले के करीब 9,985 उपभोक्ता।
कंपनी का क्या कहना है?
टाटा स्टील यूआईएसएल की प्रवक्ता के अनुसार, कंपनी को अदालत के आदेश की जानकारी मिली है और फिलहाल आदेश की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि वसूला गया शुल्क समय-समय पर सरकारी खाते में जमा किया गया है। कंपनी अब कानूनी पहलुओं और सरकारी गाइडलाइन्स के आधार पर रिफंड की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।

