राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत पाकुड़ जिले में प्रभावी रूप से की जा चुकी है। उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के आलोक में 06 जनवरी से 10 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले स्वास्थ्य मेला के दौरान टीबी उन्मूलन को लेकर व्यापक स्तर पर प्रचार–प्रसार, स्क्रीनिंग, सैंपल कलेक्शन, जांच एवं टीबी रोधी दवाओं का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
निक्षय मित्र बनने की अपील, जनभागीदारी पर जोर
टीबी मुक्त भारत अभियान में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त ने जिले के सभी वर्गों के नागरिकों के साथ-साथ सभी सरकारी विभागों के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील की है कि वे आगे आकर इलाजरत टीबी मरीजों को निक्षय मित्र के रूप में गोद लें तथा छह माह तक पोषण किट उपलब्ध कराकर उनके उपचार में सहयोग करें।
510 टीबी मरीजों को अब तक लिया गया गोद
उपायुक्त के नेतृत्व एवं सतत प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह है कि जिले में अब तक कुल 510 इलाजरत टीबी मरीजों को गोद लिया जा चुका है। इसमें स्वयं उपायुक्त द्वारा 51, उप विकास आयुक्त द्वारा 10, सिविल सर्जन द्वारा 21 तथा अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा 31 टीबी मरीजों को गोद लिया गया है। यह सहभागिता जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
जांच बढ़ाने के दिए गए निर्देश
उपायुक्त ने जिले के सभी प्रखंडों एवं सदर अस्पताल में टीबी जांच की संख्या अधिक से अधिक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि समय रहते रोग की पहचान कर उपचार प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने कहा कि जांच बढ़ने और समय पर इलाज शुरू होने से टीबी के मामलों में निश्चित रूप से कमी आएगी।
आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील
पाकुड़ जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे टीबी के लक्षणों को गंभीरता से लें, नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और उपचार को पूरा करें, ताकि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।

