Bihar: बिहार कांग्रेस में बड़ी टूट! प्रदेश अध्यक्ष की बैठक में नहीं पहुंचे 6 में से 3 विधायक

Neelam
By Neelam
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पटना के सदाकत आश्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के हेडक्वार्टर में गुरुवार को एक अहम मीटिंग हुई। मीटिंग में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए VB-GRAM-G एक्ट और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) की कानूनी गारंटी पर चर्चा हुई।

मीटिंग की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने की। राजेश राम की अध्यक्षता में आज ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ को सफल बनाने के लिए एक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलने वाले राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करना था।

बैठक में आधे विधायक नहीं पहुंचे

बैठक में पार्टी के सभी सांसदों, जिला अध्यक्षों और विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों को बुलाया गया था, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कांग्रेस के 6 में से 3 विधायक इस बैठक में नहीं पहुंचे, जिसके बाद बैठक में विधायकों की गैरहाजिरी को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जाने लगे हैं।

विधायकों की गैरमौजूदगी दे रही टूट के संकेत

दरअसल, कांग्रेस के पास अभी छह विधायक हैं। पार्टी ने उन सभी की मीटिंग में मौजूदगी अनिवार्य की थी, लेकिन आधे विधायक मीटिंग में नहीं आए। विधायकों का गायब रहना यह संकेत दे गया कि पार्टी की आंतरिक एकजुटता उतनी मजबूत नहीं जितनी नेतृत्व दिखाने की कोशिश कर रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि अगर कांग्रेस केंद्र सरकार से लड़ाई का बिगुल बजा रही है, तो पहले उसकी अपनी ‘टीम शीट’ पूरी होनी चाहिए।

जेडीयू ने कहा- कांग्रेस विधायकों का रुझान एनडीए की तरफ

कांग्रेस की बैठक से पार्टी के 3 विधायकों की अनुपस्थिति पर जदयू की बड़ी प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक झा ने कटाक्ष करते हुए कहा है कि, “कांग्रेस विधायकों का रुझान अब एनडीए की तरफ है। अगर 14 जनवरी (खरमास) के बाद ये विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में भरोसा जताते हुए हमारे साथ आ जाएं, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि, तेजस्वी यादव को सोचना चाहिए कि वे विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल साबित हो रहे हैं।”

प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने दी सफाई

वहीं, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने टूट की खबरों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कयासों पर सफाई देते हुए कहा, “जो विधायक मीटिंग में नहीं आ सके, वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में संगठनात्मक काम में व्यस्त थे। वे सभी अभियान के प्रति प्रतिबद्ध हैं।”

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