देश में बड़ी संख्या में सरकार स्कूलो की संचालन कर रही है। हालांकि, लोग अपने बच्चों को यहां पढ़ाना नहीं चाहते। इसकी सबसे बड़ी वजह है शिक्षकों की लापरवाही और उनकी मनमानी। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी शिक्षक शैक्षणिक कार्यों की खानापूर्ति करते हैं। टीचर्स मजे से लंबी छुट्टियों पर रहते हैं। लेकिन अब टीचरों की मनमानी पर शिक्षा विभाग ने नकेल कस दी है।

अनावश्यक छुट्टियों पर सख्ती
शिक्षा विभाग ने अब शिक्षकों की अनावश्यक छुट्टियों पर सख्ती शुरू कर दी है। नए आदेश के बाद अब टीचर मनमर्जी से छुट्टी नहीं ले सकेंगे।
क्या हैं नए नियमः
1) प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक द्वारा एक दिन में अधिकतम एक शिक्षक, मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा एक दिन में अधिकतम 10 प्रतिशत शिक्षकों का विशेष अवकाश या आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।
2) यदि विशेष परिस्थिति में कंडिका 1 में वर्णित सीमा से अधिक शिक्षकों को विशेष अवकाश या आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने की आवश्यकता है, तो प्रधान शिक्षक या प्रधानाध्यापक द्वारा नियंत्री पदाधिकारी से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने के उपरांत ही आकस्मिक अवकाश या विशेष अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।
3) सामान्य परिस्थिति में बिना अवकाश स्वीकृत कराए बिहार सेवा संहिता में यथानिर्धारित किसी भी अवकाश में प्रस्थान नहीं किया जाएगा। विशेष आकस्मिक परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकार को व्यक्तिगत दूरभाष एवं व्हाट्सएप पर आकस्मिकता से अवगत कराकर ही अवकाश पर प्रस्थान किया जाएगा. स्वीकृति के लिए कम से कम एक दिन पूर्व आवेदन देना होगा।
4) किसी प्रधानाध्यापक या प्रधान शिक्षक द्वारा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) शिक्षा विभाग, बांका के पूर्व अनुमोदन के उपरांत ही क्षतिपूर्ति अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।
5) विशेष आकस्मिक अवकाश प्रत्येक माह में दो लगातार दिनों के लिए एक ही बार मान्य होगा।
6) विशेष आकस्मिक अवकाश की छुट्टी, सार्वजनिक अवकाश, आकस्मिक अवकाश एवं रविवार को मिलाकर लगातार 12 दिनों तक एक साथ प्रदान किया जा सकेगा। (स्थानीय निकाय के शिक्षकों को लगातार 10 दिनों तक एक साथ अवकाश प्रदान किया जा सकता है।)
7) किसी कैलेंडर वर्ष में शिक्षकों को अधिकतम 16 दिनों का आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। कार्यरत वर्ष के दौरान में नियुक्त शिक्षकों को आकस्मिक अवकाश उस वर्ष जितने महीने वह नियोजित रहा हो, उनकी संख्या के अनुपात में देय होगा। (प्रत्येक माह के लिए 1.33 दिन का आकस्मिक अवकाश)
8) प्रधान शिक्षक या प्रधानाध्यापकों द्वारा आकस्मिक अवकाश पंजी का संधारण किए जाने के निर्देश के साथ-साथ प्रत्येक शिक्षकों के लिए अलग-अलग आकस्मिक अवकाश के लेखा का संधारण किया जाएगा।
9) विशेष आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति को आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति पर प्राथमिकता दी जाएगी।
10) आकस्मिक अवकाश को विश्रामावकाश (ग्रीष्मकालीन एवं अन्य लंबी अवधि के अवकाश यथा दुर्गा पूजा, दीपावली, छठ पूजा आदि) के साथ मिलाकर प्रदान नहीं किया जा सकता है।
आदेश तोड़ने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी
छुट्टीयों के नए आदेश जारी करने के साथ ही डीईओ की ओर से चेतावनी भी दी गई है। जो प्रिंसिपल या प्रधान शिक्षक नियम तोड़ेंगे, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि अनावश्यक छुट्टियों की वजह से बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ता है। कई स्कूलों में नियमित कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। इससे छात्रों का भविष्य खराब होगा। नए सिस्टम से शिक्षकों की उपस्थिति सुधरेगी, कक्षाएं नियमित होंगी और पाठ्यक्रम भी समय पर पूरा होगा।

