आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से आंशिक राहत मिली है। हाईकोर्ट ने इस मामले में लालू यादव की ओर से दायर याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।

निचली अदालत के फैसले को दी गई है चुनौती
लालू यादव ने आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी। लालू प्रसाद यादव ने अपनी याचिका में निचली अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के फैसले को गलत बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं और मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
कोर्ट ने सीबीआई से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि वह इस मामले में अपना जवाब दाखिल करे। इसके बाद अदालत मामले की अगली सुनवाई करेगी।
14 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जनवरी की तारीख मुकर्रर की है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस याचिका पर अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी। तब तक सीबीआई को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
क्या है आईआरसीटीसी घोटाला मामला
आईआरसीटीसी घोटाले का मामला रेलवे से जुड़े एक टेंडर और होटलों के संचालन से संबंधित है। यह मामला उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआई ने इस मामले में जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया था।
लालू यादव पर ये हैं आरोप
सीबीआई द्वारा 5 जुलाई 2017 को दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने पद पर रहते हुए मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड (SHPL) के मालिकों (विजय और विनय कोचर) को फायदा पहुंचाया। आरोप है कि आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित बीएनआर (BNR) होटलों की लीजिंग प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती गईं, जिसके बदले अनुचित लाभ लिए गए।

