दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया है। वो करीब 96 वर्ष की थीं और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। महारानी पिछले छह महीनों से अस्वस्थ चल रही थीं और उन्होंने दरभंगा स्थित कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली।महारानी कामसुंदरी देवी के निधन से पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।

महारानी कामसुंदरी के सबसे बड़े पोते रत्नेश्वर सिंह ने बताया कि सोमवार सुबह लगभग 3 बजे महारानी ने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार माधेश्वर प्रांगण में होगा। रत्नेश्वर ने कहा, “यह हम सबके लिए बहुत दुखद समय है। परिवार के सदस्य एकत्र हो रहे हैं। राजेश्वर सिंह अभी अमेरिका में हैं, जबकि कपिलेश्वर सिंह जल्द आ रहे हैं।”
10 साल की उम्र में हुआ था महाराज कामेश्वर सिंह से विवाह
महारानी कामसुंदरी देवी का जन्म 1930 में हुआ था और उन्होंने 1940 में महाराज कामेश्वर सिंह से विवाह किया था। इससे पहले महाराज ने अपनी पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया से विवाह किया था। महाराज कामेश्वर सिंह दरभंगा के अंतिम शासक थे, जिनका निधन 1962 में हुआ। उनकी पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी का निधन 1976 में हुआ, जबकि दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का निधन 1940 में हो गया था।
कल्याणी फाउंडेशन के जरिए संभाली सांस्कृतिक विरासत
महाराज कामेश्वर सिंह के निधन के बाद महारानी कामसुंदरी देवी ने उनकी स्मृति में कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। इस फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने महाराजा के नाम पर एक समृद्ध पुस्तकालय की स्थापना कराई, जिसमें आज भी करीब 15 हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही महारानी साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभाती रहीं और दरभंगा की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य किया।
परिवार में कौन-कौन?
महाराजा कामेश्वर सिंह ने 3 शादियां की थीं। हालांकि महाराजा कामेश्वर सिंह के कोई बेटा या बेटी नहीं है। साल 1962 में बनाई गई अपनी वसीयत में उन्होंने पंडित लक्ष्मीकांत झा को वसीयत का कार्यपालक नियुक्त किया था। इसके बाद उनकी संपत्ति को लेकर करीब 30 चचेरे भाइयों के बीच विवाद शुरू हो गया। इनमें कुमुद सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह जैसे नाम शामिल हैं, जो आज भी पुराने किलों और ऐतिहासिक धरोहरों की देखरेख कर रहे हैं। महाराजा की एक बहन थीं। जिनका नाम लक्ष्मी दाईजी था। महाराजा कामेश्वर सिंह के एक भाई भी थे-महाराज कुमार विश्वेश्वर सिंह बहादुर, जिनका जन्म 1908 में हुआ था। उन्हें साल 1938 में राजनगर की जागीर और पेंशन दी गई थी। वे विवाहित थे और उनके तीन बेटे थे।

