बिहार में वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत आम चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत चुनाव से पहले किसी भी प्रकार का नया परिसीमन नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि वार्ड, पंचायत और अन्य चुनाव क्षेत्रों की वर्तमान सीमाएं यथावत रहेंगी और इनमें कोई बदलाव नहीं होगा। यानी बिहार में 30 साल पुराने परिसीमन के आधार पर पंचायत चुनाव होगा।

चुनाव पुराने परिसीमन के आधार पर होंगे
बिहार में प्रस्तावित पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी तस्वीर साफ हो गई है। राज्य में होने वाला अगला पंचायत चुनाव पुराने परिसीमन के आधार पर ही कराया जाएगा। वार्ड, पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के क्षेत्रों का दायरा इस बार नहीं बढ़ेगा। इसका अर्थ है कि वर्ष 2026 में पंचायती राज संस्थाओं के करीब 2.50 लाख पदों के लिए चुनाव पुराने परिसीमन के आधार पर ही संपन्न होंगे। इसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के सभी पद शामिल हैं।
आरक्षण रोस्टर में होगा बदलाव
पंचायत चुनाव से पहले भले ही परिसीमन ना हो, लेकिन आरक्षण रोस्टर में बदलाव जरूर किया जाएगा। परिसीमन नहीं होने के बावजूद वर्ष 2026 के पंचायत चुनाव नए आरक्षण रोस्टर के आधार पर कराए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि बिहार राज्य पंचायती राज अधिनियम के तहत हर दो चुनावों के बाद आरक्षण रोस्टर में बदलाव किया जाता है। वर्ष 2016 और 2021 के चुनावों में एक ही रोस्टर लागू रहा था, लेकिन अब 2026 के चुनाव में नया रोस्टर प्रभावी होगा। इसका मतलब यह है कि जो सीटें पहले सामान्य थीं, वे आरक्षित हो सकती हैं और जो आरक्षित थीं, वे सामान्य वर्ग में जा सकती हैं।
क्या होता है आरक्षण रोस्टर?
बता दें कि आरक्षण रोस्टर के तहत यह तय किया जाता है कि कौन-सा पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी वर्गों को क्रमवार प्रतिनिधित्व और नेतृत्व का अवसर मिल सके। उदाहरण के तौर पर, पिछली बार जो मुखिया पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था, वह इस बार सामान्य या किसी अन्य वर्ग के लिए खुला हो सकता है। वहीं सामान्य श्रेणी की सीटें इस बार ईबीसी या अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित की जा सकती हैं।
क्या है परिसीमन ?
पंचायत परिसीमन वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से ग्राम पंचायतों, वार्डों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की भौगोलिक सीमा तय की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण करना होता है ताकि प्रत्येक जनप्रतिनिधि लगभग समान आबादी का प्रतिनिधित्व कर सके। चूंकि इस बार समय कम है और सरकार ने बदलाव का निर्णय नहीं लिया है, इसलिए 2021 वाली सीमाएं ही प्रभावी रहेंगी।

