बोकारो ट्रेजरी घोटाला: ₹3.15 करोड़ की फर्जी निकासी, एसपी ऑफिस का अकाउंटेंट गिरफ्तार; डीसी सख्त, 24 घंटे में रिपोर्ट तलब

KK Sagar
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झारखंड के बोकारो जिले में सरकारी खजाने (ट्रेजरी) से ₹3.15 करोड़ की अवैध निकासी का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों एक्शन मोड में हैं। इस घोटाले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडेय को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जांच में खुलासा हुआ है कि पूरी राशि पुलिस सब-इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के वेतन मद में फर्जी तरीके से निकाली गई। यह घोटाला करीब 20 महीनों (मई 2024 से मार्च 2026) तक चलता रहा, जिससे सरकारी सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कैसे हुआ घोटाला?

जांच में सामने आया कि एक दारोगा का सामान्य वेतन करीब ₹1 लाख होता है, लेकिन दस्तावेजों में हेरफेर कर इसे हर महीने ₹15 लाख से अधिक दिखाया गया। इसी आधार पर करोड़ों रुपये की निकासी की गई।

इतना ही नहीं, निकासी के दौरान नाम किसी और का और बैंक अकाउंट नंबर किसी और का देकर राशि ट्रांसफर की गई, जिससे फर्जीवाड़ा लंबे समय तक पकड़ में नहीं आया।

गोपनीय रिपोर्ट से हुआ खुलासा

इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश प्रधान महालेखाकार (PAG) चंद्रमौली सिंह की गोपनीय रिपोर्ट से हुआ। रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया।

पत्नी के खाते में गया पैसा

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अकाउंटेंट ने सरकारी राशि को अपनी पत्नी अनु पांडे के बैंक खाते में ट्रांसफर किया था।

डीसी का कड़ा एक्शन

उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी को विस्तृत जांच का आदेश दिया है। उन्हें 24 घंटे के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

डीसी ने ट्रेजरी ऑफिस और बोकारो पुलिस के डीडीओ कार्यालय से जुड़े सभी दस्तावेजों को जब्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

नई व्यवस्था लागू

भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए डीसी ने निर्देश दिया है कि अब ट्रेजरी से वेतन या विकास मद में होने वाली हर निकासी के लिए संबंधित अधिकारी का प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) अनिवार्य होगा।

ऑनलाइन सिस्टम पर सवाल, जांच जारी

डीसी अजय नाथ झा ने कहा कि ट्रेजरी पूरी तरह ऑनलाइन होने के बावजूद इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई, इसकी गहन जांच जरूरी है। असल में कितनी राशि किन-किन खातों में गई, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा।

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