ब्रेकिंग न्यूज़: अमेरिका ने WHO से आधिकारिक रूप से नाता तोड़ा

KK Sagar
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संयुक्त राज्य अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization — WHO) से आधिकारिक रूप से सदस्यता समाप्त कर दी है। गुरुवार को यह कदम प्रभावी हुआ और जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी राष्ट्रीय झंडा भी हटा दिया गया — यह संकेत है कि अमेरिका अब WHO का सदस्य नहीं रहा।

📌 फैसले का कारण

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि WHO ने वैश्विक स्वास्थ्य संकटों, विशेषकर COVID-19 महामारी के दौरान, अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से पूरा नहीं किया। इसी आधार पर अमेरिका ने संगठन से बाहर निकलने का निर्णय लिया है।

💰 बकाया और फंडिंग विवाद

WHO के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका पर लगभग 26 करोड़ डॉलर (लगभग ₹2,100 करोड़) का बकाया है जो अब तक नहीं चुकाया गया।

अमेरिका ने अब भविष्य में WHO को कोई फंडिंग नहीं देने और बकाया भुगतान रोकने का भी निर्णय लिया है।

कैसा रहेगा भविष्य का सहयोग?

अमेरिका का कहना है कि वह WHO के साथ सीमित स्तर पर सहयोग जारी रखेगा, लेकिन न तो पर्यवेक्षक के तौर पर जुड़ेगा और न ही दोबारा सदस्यता लेने की कोई योजना है। इसके बजाय वह सीधे अन्य देशों के साथ स्वास्थ्य सहयोग विकसित करेगा।

🌐 वैश्विक प्रतिक्रिया

विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले पर चिंता जताई है, क्योंकि WHO दुनिया भर में बीमारियों की निगरानी, रोकथाम व वैश्विक स्वास्थ्य नीति में अहम भूमिका निभाता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का बाहर निकलना वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

📌 क्या बदल सकता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के WHO से अलग होने से:

वैश्विक महामारी सूचना साझा करने में देरी हो सकती है।

विकसित और विकासशील देशों के बीच सहयोग प्रभावित हो सकता है।

WHO की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।

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