टाटानगर स्टेशन के बाहर चलेगा बुलडोजर: हाई कोर्ट की मोहलत खत्म, कभी भी टूट सकती हैं दुकानें

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: टाटानगर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में दशकों से जमी दुकानों पर अब संकट के बादल गहरा गए हैं। झारखंड हाई कोर्ट द्वारा दी गई मोहलत खत्म होते ही अब रेलवे का ‘पीला पंजा’ (बुलडोजर) कभी भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर सकता है। दुकानदारों ने राहत के लिए दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा है।

हाई कोर्ट का सख्त रुख: ‘राहत चाहिए तो सुप्रीम कोर्ट जाएं’
दुकानदारों ने जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में गुहार लगाई थी कि उन्हें कुछ और समय दिया जाए। हालांकि, अदालत ने दोबारा सुनवाई से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि अगर दुकानदार इस आदेश के खिलाफ कोई राहत चाहते हैं, तो उन्हें अब सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करना होगा। इस कड़े फैसले के बाद स्थानीय दुकानदारों में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला?
22 जनवरी का आदेश: हाई कोर्ट ने स्टेशन चौक से कीताडीह की ओर सड़क किनारे वर्षों से बसे दुकानदारों को एक महीने के भीतर जगह खाली करने का निर्देश दिया था।

रेलवे की जिम्मेदारी: कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया था कि वह 42 दिनों के भीतर इन दुकानदारों को वैकल्पिक स्थान पर बसाने की व्यवस्था करे।

अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च को होनी है, जिसमें रेलवे को अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

स्टेशन विस्तार योजना के तहत कार्रवाई
रेलवे स्टेशन के विस्तार के लिए कीताडीह और गोलपहाड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की तैयारी लंबे समय से चल रही है। रेलवे इंजीनियरिंग विभाग पहले ही स्टेशन-कीताडीह रोड स्थित 25 में से करीब एक दर्जन दुकानों को ध्वस्त कर चुका है। बीच में कोर्ट की प्रक्रिया के कारण अभियान रुक गया था, लेकिन अब समय सीमा समाप्त होने के बाद यह अभियान और भी तेज होने की संभावना है।

बड़ी चुनौती: हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद अभी तक रेलवे की ओर से दुकानदारों के पुनर्वास (वैकल्पिक स्थान) को लेकर कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है, जिससे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

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