टाटा स्टील में वेज रिवीजन की सुगबुगाहट: 18% MGB की उम्मीद, 5 दिन का वर्किंग डे और विदेश यात्रा जैसी बड़ी मांगे

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: टाटा स्टील के कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। लंबे समय के इंतजार के बाद आखिरकार कंपनी मैनेजमेंट और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच वेज रिवीजन को लेकर निर्णायक वार्ता शुरू हो गई है। बुधवार को हुई इस करीब दो घंटे की गहन बैठक के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि कर्मचारियों के न्यूनतम गारंटीड बेनिफिट में 18% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

मैनेजमेंट और यूनियन के बीच खींचतान
​बैठक में टाटा स्टील के CHRO जुबिन पालिया और यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू समेत अन्य पदाधिकारी शामिल थे।

सूत्रों के मुताबिक
​मैनेजमेंट का प्रस्ताव: कंपनी ने MGB में 10 हजार रुपये और NS ग्रेड के लिए 8 से 9 हजार रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
​यूनियन की मांग: यूनियन का तर्क है कि महंगाई को देखते हुए स्टील और NS ग्रेड दोनों का MGB समान रूप से 20% या उससे अधिक बढ़ना चाहिए।

चार्टर्ड ऑफ डिमांड: यूनियन की प्रमुख मांगें
​यूनियन ने मैनेजमेंट के सामने मांगों की एक लंबी सूची रखी है, जिसमें कुछ चौंकाने वाले और ऐतिहासिक बिंदु शामिल हैं।
​5-डे वर्क वीक: वर्किंग डे को घटाकर 5 दिन करना।
​विदेश यात्रा: 10 साल की नौकरी पूरी करने वाले कर्मियों को विदेश यात्रा की सुविधा।
​रिटायरमेंट के बाद भी इलाज: सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी कार्यरत कर्मचारियों जैसी ही मेडिकल सुविधा देना।
​भत्ते: नाइट शिफ्ट अलाउंस को ₹750 और एजुकेशन अलाउंस को ₹600 से बढ़ाकर ₹2500 करना।
​HRA और PF: हाउस रेंट अलाउंस को बेसिक डीए का 40% करना और पीएफ में कंपनी का योगदान बढ़ाकर 20% करना।

पिछली बार की तुलना में देरी
​वर्तमान वेज रिवीजन समझौता करीब 15 माह (31 दिसंबर 2024 से) से लंबित है। इससे पहले भी समझौतों में देरी होती रही है।
​2012 का समझौता: 20 महीने की देरी के बाद हुआ था, जिसमें 18.25% की बढ़ोतरी मिली थी।
​2018 का समझौता: 21 महीने की देरी से सितंबर 2019 में हुआ था, जिसमें 12.65% की वृद्धि मिली थी।

नुकसान का डर
​यूनियन का कहना है कि समझौते में देरी होने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान होता है, क्योंकि वेतन वृद्धि का एरियर तो मिलता है, लेकिन अलाउंस, बोनस और IB (इंसेंटिव बोनस) पर पॉइंट वैल्यू का लाभ समय से नहीं मिल पाता।
​फिलहाल, जमशेदपुर प्लांट की उत्पादकता बढ़ाने और ‘मैनपावर राइटसाइजिंग’ जैसे मुद्दों पर भी चर्चा जारी है। करीब 13,000 कर्मचारी इस नए समझौते की राह देख रहे हैं।

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