डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया: तेलंगाना के नगरकुरनूल जिले के श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में छत का एक हिस्सा ढह जाने से आठ लोग 14 किलोमीटर अंदर फंस गए हैं। भारतीय सेना, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के प्रयासों के बावजूद, 60 घंटे के बाद भी उन्हें बाहर निकालने में कोई सफलता नहीं मिल पाई है।
एनडीआरएफ और सेना की टीम सक्रिय, खनिकों की टीम भी शामिल
इस संकट को हल करने के लिए बचाव कार्यों में एनडीआरएफ और भारतीय सेना के अलावा, उत्तराखंड के सिल्कयारा बेंड-बरकोट सुरंग में फंसे निर्माण श्रमिकों को बचाने वाली खनिकों की (रैट माइनर्स) एक टीम भी शामिल हो गई है। यह टीम इन आठ लोगों को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विशेषज्ञता का उपयोग कर रही है।
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रोबोटिक कैमरे और डॉग स्क्वायड की मदद
बचाव अभियान के तहत सोमवार को एंडोस्कोपिक और रोबोटिक कैमरे सुरंग में भेजे गए। साथ ही, एनडीआरएफ के डॉग स्क्वायड को भी तैनात किया गया है ताकि किसी प्रकार के सुराग या संदेश मिल सके।
जीवित बचे श्रमिकों में उम्मीद, मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर
बचाव कार्य में लगे लोग अपने सहकर्मियों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद में हैं। इस हादसे में जीवित बचे श्रमिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
नवंबर 2023 में उत्तराखंड की सिल्कयारा सुरंग में फंसे श्रमिकों में से एक तिहाई को मानसिक अवसाद और नींद की समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इस घटना के बाद हुए शोध में यह बात सामने आई थी कि श्रमिकों को समय संबंधी भ्रम के कारण नींद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं उत्पन्न हुईं।
झारखंड के श्रमिकों के परिवारों को बुलाया गया तेलंगाना
इस संकट में फंसे श्रमिकों में चार लोग झारखंड के गुमला से हैं। उनके परिवारों के एक-एक सदस्य को सोमवार को विमान से तेलंगाना भेजने की व्यवस्था की गई।
झारखंड सरकार और गुमला के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के निर्देश पर यह कदम उठाया गया। कार्यदायी संस्था जयप्रकाश एसोसिएट्स एलटीएस ने श्रमिकों के स्वजन को घटनास्थल पर बुलाया था। यह बचाव अभियान निरंतर चल रहा है, और आशा की जाती है कि इन श्रमिकों को शीघ्र सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा।