केंद्र सरकार ने गुरुवार को जनगणना 2027 से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनगणना 2027 को लेकर विस्तृत जानकारी दी। इस बार जनगणना में 33 सवाल पूछे जाने वाले हैं, जिसमें मकान, परिवार, वाहन से जुड़े सवाल हैं। यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी।
व्यक्तिगत आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे
सबसे अहम बात यह है कि इस बार जनगणना के दौरान जुटाए गए व्यक्तिगत आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनगणना अधिनियम की धारा 15 का हवाला देते हुए कहा कि जनगणना के दौरान जुटाया गया व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की जानकारी न तो आरटीआई के तहत साझा की जा सकती है, न ही अदालतों में साक्ष्य के रूप में पेश की जा सकती है और न ही किसी अन्य संस्था के साथ साझा की जाएगी।
दो फेज में होगी जनगणना
जनगणना दो फेज में होगी। पहला फेज अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें घरों की लिस्टिंग और घरों का डेटा जुटाया जाएगा। केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के लिए 33 सवालों वाली नई प्रश्नावली जारी की है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। इस प्रश्नावली को 2011 की पिछली जनगणना के बाद भारतीय समाज में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें घर के प्रकार, स्थान और संरचना से जुड़े सवालों के साथ-साथ डिजिटल युग को देखते हुए इंटरनेट की सुविधा की उपलब्धता पर भी नया सवाल शामिल किया गया है। इसके अलावा एलपीजी, पीने के पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच को लेकर भी जानकारी ली जाएगी। दूसरा फेज फरवरी 2027 से आबादी की गिनती से शुरू होगा।
जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी
सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था।
19 भाषाओं में तैयार किया गया मैन्युअल
इस बार नई व्यवस्था स्वगणना यानि सेल्फ इन्येमुरेशन के जरिए लोग खुद इससे संबंधित सूचना दर्ज कर सकते हैं। पहला चरण अप्रैल से सितंबर के बीच होगा, जिसमें ग्यारह राज्य शामिल हैं। इसमें केरल, तमिलनाडु और त्रिपुरा जैसे राज्य भी शामिल हैं। जनगणना के लिए कुल 11000 करोड़ से ज़्यादा की राशि स्वीकृत की गई है। डिस्ट्रिक्ट स्तर पर सेंसस के लिए अधिकारियों की नियुक्ति हो चुकी है। जनगणना के लिए 19 भाषाओं में मैन्युअल तैयार किया गया है और ट्रेनिंग दी जा चुकी है। जनगणना ऐप सोलह भाषाओं में विकसित किया गया है।”
लिव-इन जोड़ों को माना जाएगा विवाहित
दिलचस्प बात यह है कि अगर कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में है और खुद को स्थायी संबंध में मानता है, तो उसे इस बार की जनगणना में विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा।स्व-गणना पोर्टल पर दिए गए अकसर पूछे जाने वाले सवालों में कहा गया है कि अगर लिव-इन संबंध में रहने वाले दो लोग एक-दूसरे को हमेशा के लिए अपना मानते हैं तो उन्हें जनगणना के दौरान वैवाहिक दंपत्ति के समान माना जाए। जनगणना के दौरान स्व-गणना का विकल्प चुनने वालों के लिए पोर्टल खोल दिया गया है। यह पोर्टल जनगणना के दोनों चरणों ‘हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ (एलएलओ) और जनसंख्या गणना के लिए उपलब्ध होगा। पोर्टल पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) की सूची दी गई है ताकि लोग देश की 16वीं जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले सवालों का आसानी से उत्तर दे सकें। FQ में कहा गया है, “क्या लिव-इन संबंध में रहने वाले जोड़े को विवाहित जोड़ा माना जाएगा? यदि वे हमेशा के लिए एक-दूसरे को अपना मानते हैं, तो उन्हें विवाहित जोड़े के रूप में माना जाए।”

