उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ चैत्र छठ, घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब

KK Sagar
2 Min Read
AI Generate सांकेतिक तस्वीर

लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व चैती (चैत्र) छठ बुधवार, 25 मार्च 2026 को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हो गया। चार दिनों तक चले इस कठिन और पवित्र अनुष्ठान के अंतिम दिन सुबह-सुबह लाखों व्रती और श्रद्धालु विभिन्न छठ घाटों पर एकत्र हुए और भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना की।

अंतिम दिन ‘उषा अर्घ्य’ के दौरान घाटों पर भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। व्रतियों ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर सूर्य देव को ठेकुआ, फल और अन्य प्रसाद अर्पित किए। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत विधिवत पूरा किया।

यह पर्व आत्म-अनुशासन, पवित्रता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है। पूरे आयोजन के दौरान व्रतियों ने पूरी श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए पूजा की। छठ घाटों पर साफ-सफाई, सजावट और दीपों की रोशनी ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया।

चार दिवसीय इस पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से हुई थी, जिसके बाद ‘खरना’ और फिर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह महापर्व पूर्ण हुआ।

इस दौरान प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। छठ घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था, प्रकाश, साफ-सफाई और चिकित्सा सुविधाओं का विशेष इंतजाम किया गया था, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

चैती छठ के अवसर पर बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला, जहां हर तरफ छठी मइया के गीत और जयकारे गूंजते रहे।

Share This Article
उत्कृष्ट, निष्पक्ष, पारदर्शिता और ईमानदारी - पत्रकारिता की पहचान है k k sagar....✍️....