नम आंखों से विदा हुए चंपाई सोरेन के पोते वीर, अंत्येष्टि में पहुंचे CM हेमंत सोरेन ने साझा किया परिवार का दर्द

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : सरायकेला-खरसावां जिले का जिलिंगगोड़ा गांव आज भारी मन और नम आंखों के साथ अपने लाडले वीर सोरेन की अंतिम विदाई का गवाह बना। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पोते वीर सोरेन गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। इस शोक की घड़ी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं उपस्थित होकर चंपाई सोरेन और उनके परिवार को ढांढस बंधाया।

संताली रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार
वीर सोरेन का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव जिलिंगगोड़ा में पूरी तरह से संताली परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोपहर करीब 2:10 बजे हेलीकॉप्टर से वहां पहुंचे और लगभग एक घंटे तक परिवार के साथ रहे। उन्होंने वीर सोरेन की अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें मिट्टी दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

पिता और दादा के लिए इससे बड़ा दुख कुछ नहीं
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री काफी भावुक नजर आए। उन्होंने चंपाई सोरेन से घटना की जानकारी ली और वीर के पिता बाबूलाल सोरेन का हाथ थामकर उन्हें सांत्वना दी। मुख्यमंत्री ने इस दुख को साझा करते हुए कहा जवान बेटे या पोते को खोना किसी भी परिवार के लिए असहनीय है। जब एक पिता या दादा को अपने बच्चे को कंधा देना पड़े, तो उस मर्माहत स्थिति की कल्पना भी नहीं की जा सकती। वीर एक होनहार युवक था, उसका असमय चले जाना पूरे परिवार के लिए एक गहरा आघात है।

कुल्लू-मनाली में बिगड़ी थी तबीयत
बता दें कि वीर सोरेन हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली घूमने गए थे, जहां अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उनका निधन हो गया। इस खबर के बाद से ही सरायकेला क्षेत्र में शोक की लहर है।

अंतिम दर्शन में उमड़ा जनसैलाब
वीर सोरेन को चंपाई सोरेन के गैरेज के समीप स्थित बाड़ी में दफनाया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि पहुंचे। मुख्यमंत्री ने ‘मारंग बुरु’ से प्रार्थना करते हुए परिवार को इस कठिन समय में शक्ति देने की कामना की।

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