गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक ऐतिहासिक संसदीय दस्तावेज साझा करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट में दावा किया कि दिसंबर 1978 में जिस तरह के Substantive Motion के आधार पर तत्कालीन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द हुई थी और उन्हें सीधे जेल जाना पड़ा था, उसी तरह की संवैधानिक प्रक्रिया आज भी लागू हो सकती है।
निशिकांत दुबे द्वारा साझा की गई तस्वीर संसद की कार्यवाही (लोकसभा डिबेट्स) के पन्नों की है, जिसमें Committee of Privileges की रिपोर्ट और उस पर हुई चर्चा का उल्लेख है। दस्तावेज में साफ तौर पर यह दर्ज है कि विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट के आधार पर सदन में Substantive Motion लाया गया था, जिस पर विचार के बाद कार्रवाई हुई।
1978 का मामला क्या था
दिसंबर 1978 में विशेषाधिकार हनन के एक मामले में इंदिरा गांधी की सदस्यता समाप्त की गई थी। उस समय सदन ने विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ कठोर कदम उठाया था। इसी ऐतिहासिक उदाहरण का हवाला देते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि संसद में नियम, परंपरा और मिसालें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।
मौजूदा विवाद से जोड़कर बयान
भाजपा सांसद का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है, जब राहुल गांधी के संसद में दिए गए एक भाषण को लेकर सत्ता पक्ष विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठा रहा है। सरकार पक्ष का कहना है कि यदि सदन में लगाए गए आरोपों का सत्यापन नहीं किया गया, तो नियमों के तहत कार्रवाई संभव है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
निशिकांत दुबे के ट्वीट और साझा किए गए दस्तावेज के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि यह संसद की परंपरा और नियमों की याद दिलाने वाला तथ्यात्मक उदाहरण है।
आगे क्या?
फिलहाल संसद सत्र के सीमित दिन बचे हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आगे बढ़ाती है या फिर सरकार और विपक्ष के बीच किसी सहमति के जरिए बजट सत्र के अगले चरण को सुचारू रूप से चलाने का रास्ता निकलता है।

