दिल्ली की ओर नीतीश, बिहार में सत्ता परिवर्तन की उलटी गिनती शुरू

KK Sagar
3 Min Read

बिहार की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच अब तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक पारी का फोकस पटना से दिल्ली की ओर शिफ्ट करते दिख रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ पद परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य और केंद्र—दोनों स्तरों पर सत्ता संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

🟡 राज्यसभा से राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके बाद वे 16 से 18 अप्रैल तक प्रस्तावित संसद सत्र में हिस्सा लेंगे। इस सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों में बदलाव और लोकसभा एवं विधानमंडलों में सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की संभावना है। ऐसे में उनकी मौजूदगी को राष्ट्रीय राजनीति में औपचारिक सक्रिय भूमिका की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

🟠 13 अप्रैल को इस्तीफे की अटकलें तेज

इसी क्रम में 13 अप्रैल को उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि राज्यसभा की शपथ लेने के बाद वे पटना लौटकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। हाल ही में बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ना भी इसी रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।

🔵 बिहार में ‘पावर शिफ्ट’ और BJP की बढ़त

नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में ‘पावर शिफ्ट’ लगभग तय माना जा रहा है। सत्ता की कमान अब भारतीय जनता पार्टी के हाथों में जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है। भाजपा इस बार गठबंधन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की रणनीति पर काम कर रही है।

🟢 जेडीयू भी बनाए रखना चाहती है प्रभाव

हालांकि, जनता दल (यूनाइटेड) पूरी तरह हाशिए पर जाने के मूड में नहीं है। सत्ता साझेदारी के तहत जेडीयू डिप्टी सीएम और विधानसभा स्पीकर जैसे अहम पदों पर दावा बनाए रखना चाहती है, ताकि सरकार में उसका प्रभाव कायम रह सके।

🟣 13 से 16 अप्रैल: बिहार की सियासत का टर्निंग पॉइंट

कुल मिलाकर, 13 से 16 अप्रैल के बीच बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। एक ओर नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आएंगे, तो दूसरी ओर राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार का रास्ता साफ होता दिख रहा है। यह घटनाक्रम बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकता है।

Share This Article
उत्कृष्ट, निष्पक्ष, पारदर्शिता और ईमानदारी - पत्रकारिता की पहचान है k k sagar....✍️....