साहिबगंज: जिले में साइबर अपराधियों के हौसले इस कदर बढ़ चुके हैं कि अब वे सीधे जिले के उपायुक्त के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। साइबर ठगों ने साहिबगंज के उपायुक्त हेमंत सती के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर लोगों से संपर्क शुरू कर दिया है।
फर्जी फेसबुक अकाउंट के जरिए पैसों की मांग
इस फर्जी फेसबुक अकाउंट के जरिए मैसेंजर पर लोगों से बातचीत कर सरकारी काम, मदद और प्रभाव का झांसा देकर पैसे ऐंठने की कोशिश की जा रही है। ठग खुद को डीसी हेमंत सती बताकर पहले भरोसा जीतते हैं और फिर अलग-अलग बहानों से पैसों की मांग करते हैं। ऐसे संदेशों से आम लोग आसानी से भ्रमित होकर ठगी का शिकार हो सकते हैं।
साइबर ठगी का शिकार होते-होते बचा बिंदेशरी यादव
इसी क्रम में बिंदेशरी यादव साइबर ठगी का शिकार होते-होते बाल-बाल बच गए। उन्होंने बताया कि फेसबुक पर उपायुक्त के नाम से बने अकाउंट से उनसे संपर्क किया गया और पूरा भरोसा दिलाने की कोशिश की गई। हालांकि संदेह होने पर उन्होंने सच्चाई की जांच की, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते शक न होता, तो भारी आर्थिक क्षति हो सकती थी।
साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस घटना ने साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले के शीर्ष अधिकारी के नाम और फोटो तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या जिला प्रशासन को इस फर्जी आईडी की जानकारी पहले नहीं थी और यदि थी, तो अब तक उस पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
जब जिले के उपायुक्त के नाम पर खुलेआम ठगी की कोशिश हो रही है और साइबर ठग सक्रिय हैं, तो यह साइबर निगरानी और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता बढ़ाने वाला संकेत है।
आम जनता से सतर्क रहने की अपील
इस मामले को लेकर बिंदेशरी यादव और साइबर सुरक्षा से जुड़े जानकारों ने आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी के नाम से आए सोशल मीडिया संदेशों पर भरोसा न करें, क्योंकि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी फेसबुक या मैसेंजर के जरिए पैसे नहीं मांगता। साथ ही अपनी बैंक जानकारी, ओटीपी या निजी विवरण किसी के साथ साझा न करें, संदिग्ध आईडी को तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करें तथा साइबर क्राइम पोर्टल या नजदीकी थाना में शिकायत दर्ज कराएं।

