भीषण गर्मी में गर्म हवा, लू एवं वज्रपात से बचने के लिए डीडीएमए ने जारी किए आवश्यक दिशा निर्देश

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मिरर मीडिया : गर्म हवा, लू व वज्रपात से बचाव के लिए अपर समाहर्ता सह जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार, धनबाद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नंदकिशोर गुप्ता ने आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं।

गर्म हवा एवं लू से बचने के लिए जितनी बार हो सके पानी पिए। सफर के दौरान भी अपने साथ पीने का पानी अवश्य रखें। धूप में निकलते समय हल्के रंग के ढीले ढाले एवं सूती कपड़े पहने। साथ ही धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें।ग गमछा या टोपी से अपने सिर को ढक कर रखें व हमेशा जूता चप्पल पहने।

घर में बनी लस्सी, नमक चीनी का घोल, छाछ, नींबू पानी, आम का पन्ना इत्यादि का नियमित सेवन करें। दैनिक भोजन में कच्चा प्याज, सत्तू, पुदीना, सौंफ तथा खस को भी शामिल करें।

जानवरों को छांव में रखें एवं उन्हें भी खूब पीने का पानी दे। रात में घर में ताजी और ठंडी हवा आने की व्यवस्था रखें। अगर तबीयत ठीक न लगे या चक्कर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

लू लगने पर क्या करें

लू लगने पर संबंधित व्यक्ति को छांव में लिटा दे। अगर उनके शरीर पर तंग कपड़े हो तो उसे ढीला कर दें अथवा हटा दें। व्यक्ति का शरीर ठंडे गीले कपड़े से पोछे या ठंडे पानी से नहालाएं। शरीर का तापमान कम करने के लिए कूलर, पंखे आदि का प्रयोग करें। गरदन, पेट एवं सिर पर बार-बार गिला तथा ठंडा कपड़ा रखें।

व्यक्ति को ओआरएस, नींबू पानी, नमक चीनी का घोल, छाछ या शरबत पीने को दें जो शरीर के जल की मात्रा को बढ़ा सके। यदि एक घंटे तक व्यक्ति की हालत में सुधार न हो तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाए।

लू लगने पर क्या न करें

जहां तक संभव हो कड़ी धूप में बाहर ना निकले। अधिक तापमान में बहुत अधिक शारीरिक श्रम न करें। चाय कॉफी जैसे गर्म पदार्थ तथा जर्दा तंबाकू आदि मादक पदार्थों का सेवन कम से कम या ना करें।

ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन जैसे मांस, अंडा व सूखे मेवे जो शारीरिक तापमान को बढ़ाते हैं का सेवन कम करें, अथवा न करें। लू के कारण यदि व्यक्ति उल्टी करे या बेहोश हो जाए तो उसे कुछ भी खाने पीने को ना दे। साथ ही बच्चों को बंद वाहनों में अकेला ना छोड़े।

वज्रपात से बचने के लिए बरते निम्न सावधानियां

वज्रपात से बचने के लिए निम्न सावधानियां बरतनी आवश्यक है।

घर में हो तो पानी का नल, टेलीफोन इत्यादि को न छुए और उससे दूर रहें तथा बिजली से चलने वाले यंत्रों को बंद कर दे। यदि दो पहिया वाहन, ट्रक, ट्रैक्टर, नौका, आदि पर सवार हो तो तुरंत उतर कर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। वज्रपात के दौरान वाहनों पर सवारी ना करें। धातु की डंडी वाले छाते का उपयोग न करें।

टेलीफोन, बिजली के पोल तथा टेलीफोन व टेलीविजन टावर से दूर रहे। कपड़े सुखाने के लिए तार के जगह जूट या सूत की रस्सी का उपयोग करें। बिजली की चमक देख तथा गड़गड़ाहट की आवाज सुनकर ऊंचे व एकल पेड़ के नीचे नहीं जाए। यदि व्यक्ति जंगल में हो तो बौने एवं घने पेड़ों की शरण में चले जाएं।

वृक्ष, दलदल वाले स्थल, जल स्रोतों से दूरी बनाए। खुले आकाश में रहने से अच्छा है छोटे पेड़ों के नीचे रहे। एक स्थान पर ज्यादा व्यक्ति इकट्ठा न हो। दो लोगों के बीच की दूरी कम से कम 13 फीट रखे। इस दौरान पानी में न रहे और अविलंब बाहर निकल जाए।

वज्रपात के दौरान यदि खेतों में है तो वही रहे। हो सके तो पैरों के नीचे लकड़ी, प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्ते रख ले। दोनों पैरों को आपस में सटा ले एवं दोनों हाथों को घुटनों पर रखकर उसको जमीन की तरफ झुका ले परंतु सिर को जमीन से ना छुआएं। जमीन पर कभी भी न लेटे।

घरों तथा खेत खलियान के आसपास कम ऊंचाई वाले उन्नत किसम के फलदार वृक्ष लगाएं। उसके तनों या टहनियों में तांबे का एक तार लगाकर जमीन में काफी गहराई तक दबा दें ताकि पेड़ सुरक्षित रहे। मजबूत छत वाला पक्का मकान सबसे सुरक्षित स्थल है। संभव हो तो अपने घरों में तड़ित चालक लगवा ले।

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