संवाददाता, धनबाद: स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला सिविल सर्जन कार्यालय से जारी किए गए एक इश्तेहार से जुड़ा है, जिसमें सरकारी नंबर की बजाय विवादास्पद लिपिक संजुत सहाय का निजी नंबर दिया गया है।
सिविल सर्जन की ओर से क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लेकर एक इश्तेहार जारी किया गया था, जिसमें बताया गया कि जिले में झोलाछाप डॉक्टर और बिना पंजीकृत अस्पताल व क्लीनिक अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही ऐसे अस्पताल, जिनका रजिस्ट्रेशन फेल हो गया है, उन्हें जल्द से जल्द प्रमाण पत्र प्राप्त करने का निर्देश दिया गया।

गंभीर सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
यहाँ गौर करने वाली बात हैं कि विज्ञापन 28 मार्च का हैं जबकि इश्तेहार 2024 तक हैं जिसमें अवैध क्लीनिक और झोलाछाप डॉक्टरों की सूचना देने के लिए मोबाइल नंबर xxxxxxxxxx जारी किया गया। आमतौर पर ऐसे मामलों के लिए सरकारी हैडलाइन नंबर जारी किए जाते हैं, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसमें विवादास्पद लिपिक संजुत कुमार सहाय का निजी नंबर दिया गया।
गौरतलब है कि संजुत कुमार सहाय पर पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप हैं, और उनके खिलाफ कई विभागीय जांचें चल रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिरकार एक घूसखोरी के आरोपी लिपिक का निजी नंबर क्यों जारी किया गया?
सिविल सर्जन पर उठे सवाल
इश्तेहार में सरकारी नंबर की बजाय लिपिक का निजी नंबर जारी करने से सिविल सर्जन कार्यालय की भूमिका भी संदिग्ध हो गई है। क्या यह गलती थी या फिर जानबूझकर ऐसा किया गया? इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता कुमार मधुरेंद्र ने इस मामले को लेकर ट्वीट किया, जिससे यह मामला और तूल पकड़ सकता है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर चूक पर क्या सफाई देता है और क्या कार्रवाई की जाती है?

