धनबाद के वैज्ञानिक Dr तापस चटर्जी का रिसर्च में ‘दोहरा शतक’, 200वां इंटरनेशनल पब्लिकेशन : अंटार्कटिक क्षेत्र पर अहम खोज

KK Sagar
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रूस की प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित शोध, समुद्री जीवों की नई प्रजाति का भी खुलासा

धनबाद के हिरापुर निवासी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक Dr Tapas Chatterjee ने रिसर्च के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने 200वें शोध प्रकाशन के साथ ‘दोहरा शतक’ पूरा कर लिया है। उनका यह नवीनतम शोध रूस से प्रकाशित प्रतिष्ठित जर्नल Protistology में 31 मार्च 2026 को प्रकाशित हुआ है।

यह रिसर्च सब-अंटार्कटिक द्वीपों—गफ, मैरियन, हर्ड और मैक्वेरी द्वीप—के समुद्री तटों पर पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों (ciliate epibionts) और माइट्स (Acari) के बीच संबंधों पर आधारित है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पहली बार इन द्वीपों पर ऐसे जीवों की मौजूदगी का रिकॉर्ड दर्ज किया है।

इस अंतरराष्ट्रीय शोध में Dr तापस चटर्जी के साथ रूस के Igor Dovgal, Alie Abibulaeva, पोलैंड के Andrzej Zawal और ब्रुनेई के David J Marshall भी शामिल रहे।

शोध के दौरान एक नई प्रजाति Stylohedra algophagae की खोज की गई, जो समुद्री माइट्स पर रहने वाला एक विशेष प्रकार का जीव (epibiont) है। इसके अलावा एक अन्य प्रजाति Cothurnia halacaricola को भी पहली बार सब-अंटार्कटिक क्षेत्र में दर्ज किया गया है।

उल्लेखनीय है कि Dr Tapas Chatterjee अब तक करीब 140 नई प्रजातियों और 4 नई जेनरा की खोज कर चुके हैं। समुद्री माइट्स और सूक्ष्म जीवों पर उनके टैक्सोनॉमिक कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली है।

उनकी यह उपलब्धि न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।

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