डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: ग्रामीण इलाकों में मलेरिया को लेकर की गई एक छोटी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसका खौफनाक मामला पोटका प्रखंड में सामने आया है। हरिणा पंचायत के चिरूगोड़ा गांव में एक ही परिवार के तीन लोग ब्रेन मलेरिया (सेरेब्रल मलेरिया) की चपेट में आ गए हैं। संक्रमितों में 35 वर्षीय आशा मुर्मू और उनके दो मासूम बेटे—6 वर्षीय फूदान मुर्मू और 4 वर्षीय देव मुर्मू शामिल हैं। तीनों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
क्यों खतरनाक हुआ मलेरिया? डॉक्टर की बड़ी चेतावनी
सीएचसी पोटका के चिकित्सक डॉ. सत्यनारायण भगत ने इस बीमारी के गंभीर होने की मुख्य वजह बताई है। उनका कहना है कि मलेरिया से बचाव और उपचार के लिए मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरी दवा नियमित रूप से लेनी चाहिए। अक्सर लोग थोड़ा ठीक महसूस होने पर दवा बीच में ही छोड़ देते हैं। ऐसा करने से संक्रमण सीधे दिमाग पर हमला करता है और ब्रेन मलेरिया जैसी जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो जाती है। वर्तमान में सीएचसी पोटका में 6 मलेरिया मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से 4 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
एंबुलेंस की कमी और सुदूर गांवों में स्वास्थ्य संकट
जब तीनों पीड़ितों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पोटका लाया गया, तो बच्चों की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया। 108 एंबुलेंस की मदद से उन्हें भेजा तो गया, लेकिन इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अब भी कई चुनौतियां हैं। हरिणा पंचायत की मुखिया सरस्वती मुर्मू ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित सुदूर पंचायतों में तुरंत अस्थायी चिकित्सा शिविर लगाकर नियमित जांच और इलाज शुरू किया जाए। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे एंबुलेंस तैनात रहे, क्योंकि समय पर गाड़ी न मिलने से मरीजों की जान पर बन आती है।

