राशन गेहूं घोटाले पर ED का शिकंजा, रानीगंज से कोलकाता तक एक साथ छापेमारी; बांग्लादेश लिंक पर फोकस

KK Sagar
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पश्चिम बंगाल में कथित राशन गेहूं तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार तड़के बड़ी कार्रवाई करते हुए कई जिलों में एक साथ छापेमारी की। रानीगंज के प्रमुख उद्योगपति और चावल कारोबारी अजय कयाल के आवास समेत करीब एक दर्जन ठिकानों पर दबिश दी गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।

सूत्रों के अनुसार, सुबह करीब 5 बजे ED की टीम चार वाहनों में एमएसबी रोड स्थित कयाल निवास पहुंची। इस दौरान CISF के जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और मौके पर भीड़ जुट गई।

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उस बड़े घोटाले से जुड़ी है, जिसमें आरोप है कि सरकार द्वारा राशन वितरण के लिए भेजा गया गेहूं बीच रास्ते से गायब कर बांग्लादेश में तस्करी किया गया। इस मामले में उत्तर 24 परगना में पहले ही प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, जिसके बाद ED ने जांच अपने हाथ में ले ली।

जांच के दौरान एजेंसी राज्य के 12 से अधिक निर्यातकों से पूछताछ कर रही है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि अजय कयाल से जुड़ी 5-6 खाद्य आपूर्ति कंपनियां जांच के दायरे में हैं, जिनके जरिए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और विदेशी व्यापार में अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।

अजय कयाल एक प्रतिष्ठित व्यापारी परिवार से जुड़े हैं। उनके पिता भगवती कयाल क्षेत्र में चावल व्यापार का बड़ा नाम रहे हैं। पारिवारिक कारोबार को अजय कयाल और उनके दिवंगत भाई संजय कयाल ने देश-विदेश तक विस्तार दिया था। अब इस पूरे नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहन जांच की जा रही है।

ED ने कोलकाता, रानीगंज, मुर्शिदाबाद, बनगांव और हावड़ा समेत करीब 12 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया है। इस दौरान बसंत कुमार सराफ नामक कारोबारी का नाम भी सामने आया है, जिसकी कंपनी के जरिए राशन सामग्री की हेराफेरी की आशंका है।

केंद्रीय बलों की सुरक्षा में चल रही इस कार्रवाई का उद्देश्य तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करना और इसमें शामिल प्रभावशाली लोगों की पहचान करना है। माना जा रहा है कि यह जांच आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे कर सकती है और चुनावी माहौल में राजनीतिक हलचल भी तेज कर सकती है।

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