भारत में इस्लाम धर्म का पवित्र त्योहार ईद-उल-फितर इस वर्ष 21 मार्च 2026 को बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व रमजान के पवित्र महीने के समापन का प्रतीक होता है और मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद खास माना जाता है।
लखनऊ के प्रमुख धर्मगुरु मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महाली ने जानकारी देते हुए बताया कि 19 मार्च को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया। इसी कारण 20 मार्च को रमजान का 30वां रोजा रखा जाएगा और उसके अगले दिन यानी 21 मार्च को ईद मनाई जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में कहीं भी चांद दिखाई नहीं दिया, जिसके चलते सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। इस्लामी कैलेंडर में चांद का दिखना नए महीने की शुरुआत का संकेत होता है, इसलिए इसकी पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
20 मार्च को रमजान का अंतिम रोजा रखा जाएगा, जबकि 21 मार्च को शव्वाल की पहली तारीख के साथ ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाएगा।
राजधानी लखनऊ के ईदगाह लखनऊ में सुबह 10 बजे ईद-उल-फितर की नमाज अदा की जाएगी, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर अल्लाह का शुक्र अदा करेंगे और देश-दुनिया में अमन-चैन की दुआ मांगेंगे।
ईद-उल-फितर केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देने वाला त्योहार भी है। इस खास दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं और जरूरतमंदों की मदद कर समाज में एकता और सौहार्द का उदाहरण पेश करते हैं।

