डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर निर्वाचन आयोग अब पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बुधवार को राज्य के सभी चुनावी पर्यवेक्षकों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा पर्यवेक्षकों के कामकाज की जांच और बूथों पर जमीनी हकीकत का जायजा लेना है।
बुनियादी सुविधाओं पर नाराजगी: सचिवालय को कड़े निर्देश
आयोग ने राज्य के कई मतदान केंद्रों पर बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। आयोग का स्पष्ट कहना है कि बूथों पर व्यवस्था दुरुस्त करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन बार-बार निर्देश के बाद भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। इस ढिलाई को देखते हुए आयोग ने ‘नवान्न’ (राज्य सचिवालय) को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
प्रत्येक जिले के लिए एक सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जाए।
ये अधिकारी सीधे बूथों की सुविधाओं की समीक्षा करेंगे और कमियों को तत्काल दूर कराएंगे।
सुरक्षा पर विशेष जोर: पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी
निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए इस बार सुरक्षा तंत्र को अभूतपूर्व तरीके से मजबूत किया गया है। आयोग ने इस बार पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या को लेकर अपनी रणनीति बदल दी है।
दोगुनी तैनाती: आमतौर पर एक पुलिस जिले या आयुक्तालय में एक ही पर्यवेक्षक होता है, लेकिन इस बार यह संख्या दोगुने से भी अधिक कर दी गई है।
विधानसभा वार निगरानी: प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक सामान्य पर्यवेक्षक तैनात किया गया है, ताकि सूक्ष्म स्तर पर निगरानी रखी जा सके।
क्या है आयोग का संदेश?
मुख्य चुनाव आयुक्त की इस बैठक और लगातार जारी सख्ती से यह साफ है कि निर्वाचन आयोग बंगाल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। सचिव स्तर के अधिकारियों की सीधे तौर पर जवाबदेही तय करना और सुरक्षा पर्यवेक्षकों की भारी तैनाती बताती है कि इस बार चुनाव को ‘जीरो एरर’ के साथ संपन्न कराने का लक्ष्य रखा गया है।

