यूनियन बजट 2026 के पेश होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स की निगाहें एक बार फिर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हुई हैं। बीते कुछ वर्षों में सरकार ने नई टैक्स रीजीम को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई और बदलती आर्थिक जरूरतों को देखते हुए इस बार बजट में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री संगठनों की मानें तो वित्त मंत्री अपने बजट भाषण में इन 10 बड़े मुद्दों पर राहत का ऐलान कर सकती हैं—
1. टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद
पिछले बजट में सरकार ने नई टैक्स रीजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को टैक्स-फ्री कर दिया था। हालांकि, पुरानी टैक्स रीजीम चुनने वाले करदाताओं को कोई विशेष राहत नहीं मिली। इस बार उम्मीद की जा रही है कि सरकार ओल्ड टैक्स रीजीम के स्लैब में भी संशोधन कर सकती है, ताकि दोनों विकल्पों के बीच संतुलन बने।
2. टीडीएस रेट्स की संख्या घटाने की मांग
फिलहाल अलग-अलग ट्रांजैक्शन पर कई प्रकार के टीडीएस रेट लागू हैं, जिससे टैक्सपेयर्स में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार टीडीएस रेट्स को घटाकर 2 या 3 स्लैब में सीमित कर सकती है, जिससे टैक्स सिस्टम सरल होगा।
3. होम लोन पर ब्याज में अधिक टैक्स छूट
रियल एस्टेट सेक्टर की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए सरकार सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट बढ़ा सकती है। फिलहाल यह सीमा 2 लाख रुपये है, जिसे बढ़ाकर 4 लाख रुपये किए जाने की संभावना है।
4. पति-पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन
आईसीएआई (ICAI) ने सरकार को सुझाव दिया है कि पति-पत्नी के लिए ‘ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम’ लागू किया जाए। अमेरिका और यूरोपीय देशों में यह व्यवस्था पहले से मौजूद है। इसके लागू होने से कामकाजी दंपतियों की कुल टैक्स देनदारी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
5. एलटीसीजी टैक्स-फ्री लिमिट बढ़ने की संभावना
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) की टैक्स-फ्री लिमिट बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान में यह सीमा 1.25 लाख रुपये है, जिसे बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किए जाने की उम्मीद है।
6. नई टैक्स रीजीम में इंश्योरेंस पर छूट
अब तक टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट सिर्फ पुरानी टैक्स रीजीम में ही उपलब्ध है। सरकार नई रीजीम को और आकर्षक बनाने के लिए इसमें भी इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन की सुविधा दे सकती है।
7. एफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा में बदलाव
मेट्रो शहरों में मकानों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ‘एफोर्डेबल हाउसिंग’ की सीमा में बदलाव कर सकती है। मौजूदा 45 लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 75 लाख रुपये किए जाने की संभावना है।
8. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए सस्ता लोन
पर्यावरण संरक्षण और ईवी सेक्टर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर लोन की ब्याज दरों में रियायत दे सकती है। इससे लोगों का रुझान पेट्रोल-डीजल वाहनों से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर बढ़ेगा।
9. डेट फंड्स के टैक्स नियमों में राहत
पिछले बजट में डेट फंड्स से होने वाले मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस मानकर टैक्स नियम सख्त कर दिए गए थे, जिससे निवेशकों की रुचि घटी है। इस बार सरकार इन नियमों में कुछ ढील देने पर विचार कर सकती है।
10. पुरानी रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की मांग
नई टैक्स रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़कर 75,000 रुपये हो चुका है, जबकि पुरानी रीजीम में यह अभी भी 50,000 रुपये है। महंगाई को देखते हुए सरकार ओल्ड रीजीम में भी स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ा सकती है।

