झारखंड जन संस्कृति मंच का पाँचवा राज्य सम्मेलन का आरंभ

KK Sagar
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रामगढ में आयोजित झारखंड जन संस्कृति मंच के दो दिवसीय पाँचवे राज्य सम्मेलन का उद्‌घाटन करते हुए दस्तावेजी फिल्मकार मेघनाथ जी ने कहा कि आज संस्कृति का प्रश्न सबसे प्रमुख हो गया है। आज संस्कृति को ही हथियार बनाकर हमारे समाज, हमारी देशज संस्कृति को बरबाद किया जा रहा है। इसे उन्होंने डी.जे. के मुकाबले नगाडे के रूपक से व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह दौर हमारी अभिव्यक्ति पर संकट का दौर तो है ही, यह हमारे देश और दुनिया के पैमाने पर कारपोरेट लूट और उसके लिए बर्बर हमले का भी दौर है। संस्कृतिकर्मियों को इस सवाल पर भी सोचना होगा और अपनी भूमिका तय करनी होगी। झारखंड के प्रसिद्ध भाषा विज्ञानी डॉ. बी. एन. ओहदार ने डॉ. रामदयाल मुंडा के समय स्थापित झारखंड की 9 भाषाओं की एक जगह एक विभाग में पढ़ाई होने को लोगों की सांस्कृतिक एकता का मूर्त रूप बताते हुए कहा कि यहाँ संस्कृति और भाषा विभिन्न धार्मिक भाषाई समूहों को एकजुट करने में मील के पत्थर का काम किया गया, लेकिन उसे तोड़ दिया गया। लंबे समय से शिक्षा संस्थानों को जिस तरह लगातार कमजोर किया जा रहा है, वह हमारी सामूहिक एकता और देशज संस्कृति पर योजनाबद्ध हमले के समान है।

जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अली इमाम ने आज के सांस्कृतिक संकटों की पहचान करते हुए कहा कि आज की संस्कृति सत्ता के संरक्षण में धर्म आधारित होती जा रही है। यह विभाजनकारी संस्कृति है जो कभी राष्ट्र‌वादी संस्कृति और कभी भारतीय ज्ञान परंपरा के रूप में दिखती है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति में वित्तीय पूंजी और कारपोरेट लूट का जिक्र करते हुए जल-जंगल-जमीन की लूट की भी चर्चा की। इसे संस्कृतिकर्मियों के लिए चिंता का विषय बताया।
प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य सचिव प्रो. मिथिलेश ने कहा कि हमें सांस्कृतिक लोगों की भूमिका सत्ता की आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछने और लोगों पर आए संकटों के लिए संघर्ष करने का काम करना होगा। उन्होंने कहा कि नागरिकों के राष्ट्र को एक अनागरिक राष्ट्र में बदलने, लोकतंत्र के तानाशाही में बदलने और संविधान जो हमारे हक, एकता की गारंटी देती है, उनके खिलाफ हमारी भूमिका यह है कि हम अपने रचनात्मक माध्यमों से आवाज उठाएं।

इप्टा के पावेल ने जनपक्षधर नाट्य आलेखों की जरूरत पर जोर दिया। कवि रजनी गुप्त ने कारपोरेट लूट और जंगलों के विनाश पर चिंता जताई। प्रोफेसर सुशीला, प्रो. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, इप्टा के मेघनाथ जी ने भी उद्‌घाटन सत्र को संबोधित किया।

इसके पूर्व लेखक और गायक सुरेंद्र कुमार बेदिया ने स्वागत वक्तव्य दिया। संचालन जसम के राज्य सचिव कवि-आलोचक बलभद्र ने किया। उद्‌घाटन सत्र की अध्यक्षता जावेद इस्लाम प्रखर पत्रकार ने की। धन्यवाद ज्ञापन कृष्णा गोप ने किया।

दूसरा सत्र सांस्कृतिक सत्र था, जिसमें झारखंड जन संस्कृति मंच टीमों ने गायन और नृत्य की प्रस्तुति की।

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