बिहार में खाली हो रही राज्यसभा की पांच सीटें, उपेंद्र कुशवाहा समेत इन सांसदों के भविष्य का होगा फैसला

Neelam
By Neelam
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भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होगी। 16 मार्च को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान और शाम 5 बजे से मतगणना होगी। जिन 37 सीटों पर चुनाव की घोषणा हुई है, उनमें बिहार की पांच राज्यसभा सीटें भी शामिल हैं। बिहार की इन पांच सीटों के लिए होने वाला चुनाव बिहार की सियासत में नई गणित और नई रणनीतियों को जन्म देगा।

आंकड़े के आधार पर एनडीए मजबूत स्थिति में

बिहार में 9 अप्रैल में 5 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। जिनमें अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेमचंद गुप्ता, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण सिंह का नाम शामिल हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटें मिली थीं। इसमें बीजेपी 89, जदयू 85, लोजपा रामविलास 19, हम 5 और आरएलएम 4 सीटों के साथ शामिल हैं। इस आंकड़े के आधार पर एनडीए आराम से चार सीटें जीत सकता है और पांचवीं पर भी मजबूत दावेदारी रखता है।

जदयू में रिपीट पर सस्पेंस

जदयू के जिन दो नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का नाम है। दोनों पार्टी के सीनियर लीडर हैं। नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं। पार्टी की तरफ से दोनों को दो-दो बार राज्यसभा भेजा जा चुका है। नीतीश कुमार ने दो बार से ज्यादा किसी नेता को बहुत कम बार राज्यसभा भेजा है। ऐसे में अभी तक संशय बरकरार है, लेकिन बड़े पद पर होने और सीएम के करीबी होने के कारण चर्चा है कि इन्हें एक बार फिर से रिपीट किया जा सकता है।

भाजपा देगी भोजपुरी सिंगर पवन सिंह को मौका?

इधर, चर्चा है कि बीजेपी अपने कोटे से भोजपुरी सिंगर पवन सिंह को राज्यसभा भेज सकती है। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले वह भाजपा में शामिल हुए। पार्टी के लिए धुआंधार प्रचार किया। ऐसे में ये तय माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें कोई बड़ा पद देकर इनाम दे सकती है। चुनाव से ठीक पहले बीजेपी के सीनियर लीडर और सांसद मनोज तिवारी ने कहा था, ‘पवन सिंह के लिए सबकुछ तय है। हालांकि न पार्टी नेता और न पवन सिंह इस पर अभी तक कुछ भी स्पष्ट बोले हैं।

कुशवाहा का दोबारा राज्यसभा जाना मुश्किल

उपेंद्र कुशवाहा फिलहाल राज्यसभा सदस्य हैं, लेकिन दोबारा मौका मिलना मुश्किल माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव में हार और बदले समीकरणों के बाद उनका भविष्य अनिश्चित है। दरअसल, विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने अपने बेटे को सीधे मंत्री बनाकर लॉन्च कर दिया है। ऐसे में पत्नी विधायक, बेटा मंत्री और कुशवाहा को राज्यसभा भेजकर परिवारवाद को बढ़ावा देने की तोहमत से बीजेपी बचेगी। ये तय माना जा रहा है कि कुशवाहा अपने बेटे को जरूर सेट कर लिए, लेकिन अप्रैल बाद वे किसी सदन के सदस्य नहीं होंगे।

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