ये सोशल मीडिया का जमाना है। बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक में सोशल मीडिया की लत देखी जा रही है। एक तरफ माता-पिता परेशान हैं कि उनके बच्चे मोबाइल नहीं छोड़ते। तो दूसरी ओर बड़ों की भी हरकतें कम नहीं है। घंटों सोशल मीडिया पर वक्त बिताने की वजह से काम का नुकसान करा रहे हैं। ऐसे में बिहार सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं।
सरकारी नीतियों और योजनाओं पर निजी राय नहीं दे सकेंगे
सरकार ने ‘बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 2026’ को पूरे राज्य में लागू कर दिया। बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली के तहत अब कोई भी सरकारी कर्मी बिना अनुमति के फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम या यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर सरकार की नीतियों और योजनाओं पर निजी राय व्यक्त नहीं कर सकेगा।
कोर्ट के फैसलों पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं कर सकेंगे
नए नियमों के अनुसार, सरकारी सेवक अब सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों पर भी सार्वजनिक टिप्पणी नहीं कर पाएंगे। यदि कोई कर्मचारी ऐसा करता है, तो उसे कदाचार की श्रेणी में माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल भी होगा खतरनाक
इसके अलावा सरकारी कर्मचारी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या चलाने के लिए सरकारी ईमेल आईडी या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। फर्जी प्रोफाइल, नकली पहचान या नकली नाम से पोस्ट करना भी सख्त मना है।
दफ्तर के अंदर वीडियो बनाना बैन
इतना ही नहीं, अब दफ्तर के अंदर वीडियो बनाना, रील शूट करना या किसी मीटिंग का लाइव टेलीकास्ट करना भी पूरी तरह बैन रहेगा। अगर कोई कर्मचारी ऑफिस के अंदर की तस्वीरें, वीडियो या गोपनीय दस्तावेज सोशल मीडिया पर शेयर करता है, तो यह गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
किसी राजनीतिक दल को लेकर कमेंट करने की मनाही
सरकार ने यह भी साफ किया है कि कोई भी कर्मचारी सोशल मीडिया पर किसी राजनीतिक दल, मीडिया संस्थान या खास शख्सियत का समर्थन या विरोध नहीं करेगा। साथ ही, जाति, धर्म या किसी संवेदनशील मुद्दे पर भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट डालने पर भी रोक लगा दी गई है।

