डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड से एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव की खबर सामने आई है। बुंडू गांव के रेंगो टोला में एक ही परिवार के चार सदस्यों ने ईसाई धर्म त्याग कर अपनी जड़ों की ओर लौटने का फैसला किया है। आदिवासी ‘हो’ समाज की पारंपरिक रीति-रिवाजों और ‘जाते-परचि’ (शुद्धिकरण) अनुष्ठान के साथ इस परिवार की सरना धर्म में आधिकारिक वापसी हुई।
बीमारी और उम्मीद की वह कहानी
करीब दो साल पहले 28 वर्षीय सोंगा केराई ने परिवार में चल रही बीमारी से निजात पाने और चमत्कार की उम्मीद में ईसाई धर्म अपना लिया था। वह अपनी पत्नी सोमवारी कुई और दो मासूम बच्चों (5 वर्षीय सुरेश और 2 वर्षीय प्रकाश) के साथ हर रविवार चर्च जाने लगे थे।
बदलाव का फैसला क्यों?
अपेक्षाएं पूरी न होना: धर्म परिवर्तन के दो साल बाद भी परिवार की स्थिति और स्वास्थ्य में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ।
सांस्कृतिक जुड़ाव: सोंगा केराई ने महसूस किया कि वे अपनी मूल प्रकृति-पूजक संस्कृति से कट रहे हैं।
जागरूकता अभियान: ‘हो’ समाज युवा महासभा द्वारा चलाए जा रहे नुक्कड़ सभाओं और सम्मेलनों ने उन्हें अपनी विरासत पर गर्व करना सिखाया।
लाल मुर्गे की बलि और ‘जाते-परचि’ अनुष्ठान
वापसी का यह कार्यक्रम गांव के मुण्डा और दियुरी (पुजारी) की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
शुद्धिकरण: दियुरी जवान अंगरिया ने पारंपरिक पद्धति से पूजा की और लाल मुर्गे की बलि देकर परिवार का शुद्धिकरण कराया।
सम्मान: समाज ने परिवार को नई धोती, गंजी, साड़ी और गमछा भेंट कर उन्हें पुनः गले लगाया।
संकल्प: परिवार ने अब जन्म, विवाह और मृत्यु से जुड़े सभी ‘हो’ संस्कारों और बोंगा-बुरू की मान्यताओं को मानने का संकल्प लिया है।
युवाओं को अपनी संस्कृति से जुड़ने की अपील
इस मौके पर आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड ने कहा कि हमारी प्राचीन परंपराएं और धर्म-दस्तूर ही हमारी असली पहचान हैं। युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़े रहना चाहिए। वहीं, अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी ने युवाओं को दियूरी सम्मेलन और युवा महोत्सवों में भाग लेने की सलाह दी ताकि वे अपनी समृद्ध संस्कृति को गहराई से समझ सकें। कार्यक्रम में ग्रामीण मुण्डा गुनाराम अंगरिया, हो भाषा शिक्षक कृष्णा तोपनो, ओयबन हेम्ब्रम और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे, जिन्होंने इस परिवार का समाज में स्वागत किया।

