पटना में फायर विभाग के आईजी सुनील कुमार नायक गिरफ्तार, ट्रांजिट रिमांड पर आंध्र ले जाने की तैयारी

Neelam
By Neelam
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पटना में फायर विभाग के आईजी सुनील कुमार नायक को उनके सरकारी आवास पर छापेमारी के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले सुनील नायक के सरकारी आवास पर आंध्र प्रदेश पुलिस ने छापेमारी की। यह कार्रवाई 2021 के एक मामले से जुड़ी है। उनके खिलाफ IPC की धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत मामला दर्ज है। यह मामला आंध्र प्रदेश के नरसापुरम से पूर्व सांसद रघुराम कृष्णा राजू से जुड़ा है।

गिरफ्तारी के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा

गिरफ्तारी के दौरान पटना में उनके आवास के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा भी देखने को मिला। आंध्र प्रदेश पुलिस जब 2005 बैच के इस IPS अधिकारी को हिरासत में लेने पहुंची, तो उनके समर्थन में होम गार्ड के जवान ट्रैक सूट में मुस्तैद दिखे। काफी हंगामे के बाद आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब पटना के कोर्ट में पेशी के बाद ट्रांजिट रिमांड पर उन्हें आंध्र प्रदेश ले जाया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा मामला साल 2021 का है, जब सुनाल नायक आंध्र प्रदेश में सीआईडी में तैनात थे। उस दौरान उनके निर्देश पर नरसापुरम के तत्कालीन सांसद के. रघुराम कृष्णा राजू को गिरफ्तार किया गया था। पूर्व सांसद ने आरोप लगाया था कि गिरफ्तारी और हिरासत के दौरान सीआईडी की टीम ने उनके साथ गंभीर मारपीट की। इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा और बाद में कोर्ट के दखल के बाद आईजी सुनील नायक के खिलाफ हत्या के प्रयास (धारा 307) जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।

जमानत रद्द होने के बाद कार्रवाई

इस मामले में सुनाल नायक को कानूनी राहत मिली हुई थी। लेकिन हाल ही में उनकी जमानत रद्द हो गई, जिसके बाद आंध्र प्रदेश पुलिस सक्रिय हुई। पटना के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र स्थित उनके आवास पर सुबह-सुबह पहुंची टीम ने सघन छापेमारी की और आईजी को हिरासत में ले लिया।

सुनील नायक 2005 बैच के IPS

सुनील कुमार नायक बिहार कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के रहने वाले हैं, लेकिन उन्हें बिहार कैडर आवंटित हुआ था। उन्होंने 12 दिसंबर 2005 को आईपीएस सेवा जॉइन की और अपने करियर की शुरुआत बिहार में की। वे कई जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर भी तैनात रहे। वर्ष 2019 में व्यक्तिगत कारणों के आधार पर उन्हें इंटर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर आंध्र प्रदेश भेजा गया। यह प्रतिनियुक्ति तीन वर्षों के लिए थी, जो 7 जनवरी 2020 से प्रभावी हुई। आंध्र प्रदेश में वे सीआईडी में डीआईजी के पद पर तैनात रहे. इस दौरान उन्होंने कई संवेदनशील मामलों की जांच की निगरानी की। वर्ष 2021 में एक कथित हिरासत प्रताड़ना (कस्टोडियल टॉर्चर) का मामला चर्चा में आया, जो पूर्व सांसद रघुरामा कृष्णा राजू से जुड़ा था। प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद वर्ष 2023 में वे वापस बिहार लौट आए। फरवरी 2026 तक वे बिहार फायर सर्विसेज में आईजी सह निदेशक-कम-स्टेट फायर ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे।

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