डिजिटल डेस्क। रांची : झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 20 सितंबर को अपने ट्वीट में बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि एसीबी के महत्वपूर्ण कमरों में आज दो-दो ताले लगाने पड़े हैं, जबकि कल रात वहां से संवेदनशील दस्तावेजों की फाइलें और कंप्यूटर हार्ड डिस्क्स निकालकर ले जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने इसे शराब घोटाले जैसे संवेदनशील मामलों के सबूत नष्ट करने की साजिश करार देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की, जो स्वयं एसीबी के प्रभारी मंत्री हैं। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आरोप को निराधार बताया है।
शराब घोटाले के सबूतों से छेड़छाड़ का गंभीर दावा
बाबूलाल मरांडी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘यह मामला एसीबी से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मामलों से जुड़े सबूतों को नष्ट करने का गंभीर मामला जान पड़ता है।’ उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि ‘इससे पहले कि शरारती षड्यंत्रकारी लोग अपनी साजिशपूर्ण कार्यों की आंच में आपको भी लपेट लें, इस मामले में एफआईआर कर तुरंत जांच कराईए और कार्रवाई कीजिए।’ इस ट्वीट में उन्होंने @HemantSorenJMM, @PMOIndia, @HMOIndia, @ANI और @PTI_News को टैग किया, जिससे इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश साफ दिखाई देती है।
दस्तावेज गायब करने और अपराधियों को बचाने के आरोप
बाबूलाल मरांडी ने एसीबी पर शराब घोटाले से जुड़े दस्तावेज गायब करने और अधिकारियों व अपराधियों को बचाने के आरोप पहले भी लगाए हैं। उनके पुराने ट्वीट्स और बयानों में इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठाए गए हैं, जो उनके वर्तमान दावों को बल देते हैं।
- मारांडी ने पहले दावा किया था कि एसीबी ने शराब घोटाले की जांच में जानबूझकर देरी की और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट किया, जिससे असली अपराधी बच गए।
- उन्होंने एसीबी पर आरोप लगाया था कि यह ब्यूरो सरकार के इशारे पर काम कर रहा है और शराब घोटाले के मुख्य साजिशकर्ताओं को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ कर रहा है।
बाबूलाल के पोस्ट को जनता का समर्थन
देव एक्स पर लिखते हैं, बाबूलाल मरांडी के ट्वीट को सीमित प्रतिक्रिया मिली, लेकिन यह एसीबी पर सवाल उठाने का प्रयास है। संतोष ने मरांडी को राज्य के मार्गदर्शक के रूप में समर्थन दिया, जो एसीबी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। सोनो विजय एसीबी की निष्क्रियता पर सवाल उठाया, “क्या सभी एक ही हैं,” जो भ्रष्टाचार के खिलाफ मरांडी के रुख को बल देता है।
डीजीपी की नियुक्ति और पुलिसिंग पर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को भी अवैध बताते हुए लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनके अनुसार, यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है और गुप्ता को अवैध रूप से सेवानिवृत्ति के बाद भी पद पर बनाए रखा गया है। मरांडी ने इस मामले को लेकर कोर्ट में याचिका भी दायर की है। मरांडी का आरोप है कि डीजीपी के नेतृत्व में झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हुई है। उनका कहना है कि पुलिस का मनोबल गिरा है, जिसके कारण अपराध बढ़ रहे हैं और सरकार राजनीतिक लाभ के लिए पुलिस का दुरुपयोग कर रही है।
मरांडी के आरोप निराधार: झामुमो
बाबूलाल मरांडी के इस आरोप के बाद अब तक राज्य सरकार या हेमंत सोरेन की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। विपक्षी नेता की मांग है कि एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जाए। जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या एसीबी की कार्रवाई नियमित थी या इसके पीछे शराब घोटाले जैसे मामलों में सबूत छिपाने की साजिश है, जिसका जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकता है। सत्ता पक्ष मरांडी के आरोपों को निराधार बताता रहा है। झामुमो नेता मरांडी पर आरोप लगाते हैं कि वह अपना चेहरा चमकाने को ऐसे ट्वीट करते हैं। झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोपों को पूरी तरह आधारहीन, राजनीतिक साजिश और गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कड़ी निंदा की है।

