इंकैब अधिग्रहण विवाद: कर्मचारियों ने खटखटाया NCLAT का दरवाजा, पूर्व और वर्तमान RP पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: इंकैब इंडस्ट्रीज के अधिग्रहण को लेकर छिड़ा कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर आ गया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल कोलकाता द्वारा वेदांता की समाधान योजना को मंजूरी दिए जाने के खिलाफ अब कंपनी के कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने इस फैसले को NCLAT (नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल) में चुनौती दी है, जिस पर 16 जनवरी को सुनवाई होने की संभावना है।

क्या है पूरा मामला?
​बता दें कि 3 दिसंबर 2025 को NCLT कोलकाता ने वेदांता लिमिटेड की 545 करोड़ रुपये की समाधान योजना को हरी झंडी दी थी। इस योजना के तहत इंकैब का अधिग्रहण किया जाना है। हालांकि, कर्मचारियों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं।

पूर्व और वर्तमान RP पर लगे संगीन आरोप
​कर्मचारियों के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव के अनुसार, अपीलीय ट्रिब्यूनल में दायर याचिका में वर्तमान और पूर्व रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

पुराना विवाद और जालसाजी

आरोप है कि पूर्व RP शशि अग्रवाल और वर्तमान RP पंकज टिबरेवाल ने कोर्ट के पुराने आदेशों को दरकिनार कर कमला मिल्स और पेगासस जैसी कंपनियों के साथ मिलकर कथित रूप से फर्जीवाड़ा किया। याचिका में उल्लेख है कि शशि अग्रवाल को कदाचार के कारण पहले ही पद से हटाया जा चुका है और IBBI ने उनकी योग्यता स्थायी रूप से समाप्त कर दी है।

नए दावेदारों का प्रवेश

कर्मचारियों का दावा है कि नए RP पंकज टिबरेवाल ने न केवल पुराने ‘फर्जी’ दावों को स्वीकार किया, बल्कि ICICI बैंक और ट्रॉपिकल वेंचर्स जैसे नए दावेदार भी खड़े कर दिए, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी?
​अपील में यह भी कहा गया है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 6 जनवरी 2016 को इंकैब की कुल बैंक देनदारी महज 21.63 करोड़ रुपये तय की थी। इसके बावजूद, अधिग्रहण प्रक्रिया में बड़े आंकड़ों और नए दावों का खेल चल रहा है, जिससे हजारों कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। अब सबकी निगाहें 16 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इंकैब का भविष्य किस दिशा में जाएगा।

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