डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: बिष्टुपुर का पोस्टल पार्क शनिवार को व्यापारियों और उद्यमियों के आक्रोश का गवाह बना। सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने धालभूमगढ़ में प्रस्तावित एयरपोर्ट के निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। सात साल पहले जिस परियोजना का शिलान्यास बड़े दावों के साथ किया गया था, उसका काम आज भी अधर में लटका है।
प्रमुख बिंदु: आखिर क्यों बढ़ा व्यापारियों का गुस्सा?
शिलान्यास के 7 साल बाद भी शून्य प्रगति: व्यापारियों ने याद दिलाया कि 2019 में इस एयरपोर्ट की नींव रखी गई थी, लेकिन आज भी जमीन पर कोई काम नजर नहीं आ रहा है।
निवेश और विकास पर ब्रेक: चैंबर के अनुसार, हवाई सेवा न होने के कारण जमशेदपुर की कनेक्टिविटी कट गई है। इससे न केवल नए निवेशक यहां आने से कतरा रहे हैं, बल्कि शहर के युवाओं को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ रहा है।
‘टापू’ बन गया है शहर: अध्यक्ष मानव केडिया ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की आपत्तियां दूर होने के बावजूद काम शुरू न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। बिना एयरपोर्ट के जमशेदपुर एक कटे हुए टापू की तरह महसूस कर रहा है।
चैंबर की रणनीति: अब सीधे PMO तक पहुंचेगी आवाज
सिर्फ धरना-प्रदर्शन ही नहीं, सिंहभूम चैंबर ने इस लड़ाई को अब दिल्ली की दहलीज तक ले जाने का फैसला किया है।
500 पोस्टकार्ड अभियान: चैंबर प्रधानमंत्री को 500 पोस्टकार्ड भेजकर इस परियोजना को तत्काल धरातल पर उतारने की मांग करेगा। व्यापारियों का साफ कहना है कि जब तक ठोस प्रगति नहीं दिखेगी, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।
जरूरत क्यों है?
समस्या-एयरपोर्ट से समाधान
गंभीर मरीज- बेहतर इलाज के लिए महानगरों तक त्वरित पहुंच।
औद्योगिक विकास-नए निवेशकों का आगमन और आत्मनिर्भर भारत में योगदान।
युवा पलायन-स्थानीय स्तर पर नए अवसर और व्यवसाय का विस्तार।
प्रदर्शन में उपस्थिति
इस विरोध प्रदर्शन में चैंबर अध्यक्ष मानव केडिया, महामंत्री पुनीत कावटिया, उपाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल व राजीव अग्रवाल, सचिव भरत मकानी व विनोद शर्मा, कोषाध्यक्ष अनिल रिंगसिया सहित शहर के तमाम दिग्गज व्यवसायी मौजूद रहे।

