डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड को सुरक्षित और सशक्त महिलाओं का राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सिदगोड़ा स्थित बिरसा मुंडा टाउन हॉल में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने एक सुर में बाल विवाह को जड़ से मिटाने की शपथ ली।

परंपराएं मानव गरिमा से बड़ी नहीं: उप विकास आयुक्त
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने कहा कि समाज में परंपराएं तभी तक आदरणीय हैं जब तक वे किसी के अधिकारों का हनन न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के की शादी अपराध है। प्रशासन बाल विवाह रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए सामाजिक जागरूकता और सक्रियता अनिवार्य है।
प्रशासनिक तत्परता: जिला प्रशासन और पुलिस पूर्वी सिंहभूम को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए मिशन मोड में काम करेंगे।
जमीन पर बदलाव लाने की जरूरत: अनुमंडल पदाधिकारी
SDO धालभूम, श्री अर्नव मिश्रा ने व्यावहारिक बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि सिर्फ चर्चाओं से काम नहीं चलेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि समाज के कितने लोग अपने आस-पास हो रहे बाल विवाह का विरोध करते हैं? उन्होंने कहा कि जिस दिन लोग स्वयं इस बुराई के खिलाफ आवाज उठाएंगे, बाल विवाह अपने आप खत्म हो जाएगा।
चिंताजनक आंकड़े और सख्त कानून
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती संध्या रानी ने राज्य की स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि झारखंड में बाल विवाह की दर 32.2 प्रतिशत है, जो एक गंभीर चुनौती है। बाल विवाह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है।
कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और जनता की जानकारी ही इसे रोकने के सबसे मजबूत हथियार हैं।
इन्होंने ली सहभागिता
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा, बीडीओ, सीओ, मुखिया, ग्राम प्रधान, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, एएनएम, पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी सेविकाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एकजुट होकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया।

