झारखंड पुलिस को राजनीतिक जागीर बना दिया गया’—DGP नियुक्ति पर बाबूलाल मरांडी का सोरेन सरकार पर तीखा हमला

KK Sagar
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रांची। झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि झारखंड सरकार ने राज्य पुलिस को राजनीतिक जागीर और ‘पिक एंड चूज’ का अड्डा बना दिया है।

बाबूलाल मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा “कार्यवाहक DGP संस्कृति” पर की गई सख्त टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि अदालत के आदेश ने उनके द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर मुहर लगा दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने वर्दी की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और यह मामला अब पूरे देश के लिए एक नकारात्मक उदाहरण बन चुका है।

अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर सवाल

मरांडी ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के आरोपी और विवादित अधिकारी अनुराग गुप्ता को नियमों की अनदेखी कर DGP बनाया गया। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें पद पर बनाए रखने के लिए असंवैधानिक तरीके से सेवा विस्तार की कोशिश की गई, जबकि नियम स्पष्ट है कि सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। इसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रकाश सिंह’ फैसले की सीधी अवमानना बताया।

‘अस्थायी व्यवस्था’ से रिमोट कंट्रोल का आरोप

अनुराग गुप्ता के हटने के बाद तदाशा मिश्रा को जिम्मेदारी दिए जाने पर भी मरांडी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा नियमों का पालन करने की नहीं, बल्कि ‘अस्थायी व्यवस्था’ के जरिए पुलिस तंत्र को रिमोट कंट्रोल से चलाने की है। दिसंबर में तबादलों और नियुक्तियों को लेकर हुए घटनाक्रम को उन्होंने संस्थागत गरिमा के खिलाफ बताया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला

मरांडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कार्यवाहक DGP की नियुक्ति योग्य अधिकारियों के करियर के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां अदालत UPSC की प्रक्रिया अपनाने की बात कर रही है, वहीं झारखंड में बुनियादी नियमों को भी रौंदा जा रहा है।

सरकार से की तत्काल कार्रवाई की मांग

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुख्य सचिव को तलब किए जाने से पहले इस “असंवैधानिक प्रथा” को समाप्त किया जाए। उन्होंने मांग की कि राज्य के सबसे योग्य और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम तुरंत UPSC को भेजे जाएं और पूर्णकालिक DGP की नियुक्ति की जाए। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और झारखंड की जनता इस मनमानी का हिसाब जरूर लेगी।

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