कैरव गांधी अपहरण कांड: पुलिस की घेराबंदी से घबराए अपहरणकर्ता, जीटी रोड पर छोड़ भागे, एसएसपी का खुलासा, अभी कोई गिरफ्तारी नहीं

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क/ जमशेदपुर : कैरव गांधी अपहरण मामले में पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि अपहरणकर्ताओं ने लगातार पुलिस दबाव और घेराबंदी से घबराकर कैरव को जीटी रोड पर छोड़कर फरार हो गए। जमशेदपुर एसएसपी पीयूष पांडेय ने मंगलवार सुबह आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह कोई समझौता नहीं, बल्कि पुलिस की सटीक रणनीति और सक्रियता का नतीजा है। एसएसपी ने कहा कि कैरव की सुरक्षित वापसी पुलिस के दबाव से संभव हुई, लेकिन अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है।

जांच के दौरान पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली कि अपहरणकर्ता कैरव को नए ठिकाने पर ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इस पर पुलिस ने तुरंत संभावित मार्गो पर सादे लिबास में जवानों की तैनाती कर घेराबंदी कर दी। अपहरणकर्ताओं को लगा कि पुलिस उनके बहुत करीब है और रंगे हाथ पकड़े जाने का खतरा है। इसी डर से उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए कैरव को चौपारण-बरही (जीटी रोड) के बीच सुनसान इलाके में छोड़कर भाग गए। पुलिस टीमों ने पहले से अलर्ट रहते हुए कैरव को तुरंत बरामद किया और सुरक्षा सुनिश्चित कर परिजनों के आग्रह पर उन्हें सर्किट हाउस स्थित घर पहुंचाया।

एसएसपी ने जोर दिया कि कैरव की वापसी पुलिस की प्राथमिकता थी, जो सफल रही। हालांकि, मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अपहरणकर्ताओं की पहचान, गिरोह का भंडाफोड़ और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई की जानकारी समय पर दी जाएगी।

यह पूर्वी सिंहभूम का पहला ऐसा अपहरण मामला है, जिसमें अपहरण की पुष्टि के बावजूद अब तक कोई अपहरणकर्ता पकड़ा नहीं गया। अपहरणकर्ताओं ने इंडोनेशियाई नंबर से 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी और कैरव को 13 से 26 जनवरी तक 14 दिनों तक बंधक रखा। पुलिस ने झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मल्टी-स्टेट ऑपरेशन चलाया, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो सकी। शहर में कैरव की वापसी से राहत है, लेकिन अपहरणकर्ताओं के फरार होने से सुरक्षा चिंता बनी हुई है। पुलिस का ऑपरेशन जारी है।

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