राज्यसभा की राह पर कल्पना सोरेन? झारखंड में दो सीटों पर चुनाव से बढ़ेगी राजनीति हलचल

KK Sagar
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झारखंड की राजनीति में इन दिनों गांडेय विधायक कल्पना सोरेन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का अगला ठिकाना राज्यसभा हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

क्या है पूरा मामला

राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। एक सीट शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली होगी।

कल्पना सोरेन क्यों हैं चर्चा में

कम समय में राजनीति में सक्रिय होकर प्रभाव बनाने वाली कल्पना सोरेन को झारखंड मुक्ति मोर्चा की नई नेतृत्व पंक्ति के रूप में देखा जा रहा है। उनका राज्यसभा जाना पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

झामुमो की रणनीति और फायदा

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए यह कदम दिल्ली में अपनी पकड़ मजबूत करने का जरिया बन सकता है। इससे झारखंड के आदिवासी, भूमि, खनिज और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जा सकेगा।

विधानसभा का गणित क्या कहता है

राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में सत्ताधारी महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं—झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (4) और भाकपा (माले) (2)। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 28 वोट की जरूरत होती है। ऐसे में गठबंधन एकजुट रहा तो दोनों सीटों पर जीत संभव है।

कांग्रेस का रुख अहम

सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि पहले कई बार उन्होंने त्याग किया है, इसलिए इस बार एक सीट पर उनका दावा बनता है।

एनडीए की स्थिति कमजोर

वहीं विपक्षी एनडीए के पास फिलहाल पर्याप्त संख्या बल नहीं है। भाजपा के 21 और सहयोगियों को मिलाकर कुल 24 विधायक हैं, जिससे बिना क्रॉस वोटिंग के जीत मुश्किल दिख रही है।

राजनीतिक संदेश क्या होगा

यदि कल्पना सोरेन राज्यसभा जाती हैं, तो यह महिला सशक्तिकरण और आदिवासी नेतृत्व के लिहाज से एक बड़ा राजनीतिक संदेश होगा। साथ ही, यह झामुमो के संगठनात्मक भविष्य को भी मजबूत करेगा।

कुल मिलाकर, झारखंड की दोनों राज्यसभा सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज है। अब सबकी नजर महागठबंधन के भीतर तालमेल और अंतिम उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी हुई है।

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