मिरर मीडिया : भाषा संस्कृति और उसकी सभ्यता की पहचान होती है। हमारी संस्कृति एयर उससे जुड़े लोग भाषा से भी पहचाने जाते हैं। परन्तु भाषा को भी अब राजनीति रूप दिया जा रहा है। आपको बता दें कि झारखंड इन दिनों भाषा विवाद में उलझा हुआ है। राज्य में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। कहीं पुतले फूंके जा रहे हैं तो कहीं मानव श्रृंखला बना विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। कहीं लोग सड़कों पर उतर रहे हैं तो कहीं विधानसभा के घेराव का एलान हो रहा है। बयानबाजियों का सिलसिला तेज है और इस विवाद की आंच में सियासी कुनबे अपनी-अपनी खिचड़ी पका रहे हैं। सबसे हैरत की बात तो यह कि क्षेत्रीय भाषाओं की सूची पर खड़े हुए विवाद में राज्य की तीन सबसे बड़ी पार्टियों झारखंड मुक्ति मोर्चा, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेता बंटे हुए हैं।हालांकि भाजपा इस मुद्दे पर अभी भी खुल के बात नही कर रही है।वही इन तीनों पार्टियों के भीतर दो-दो फांक है। आजसू ने तो उर्दू,भोजपुरी, अंगिका और मगही का विरोध कर अपना स्टेंड साफ कर दिया है। राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने भी पार्टी फोरम से अलग बयान देते हुए लगातार इसके विरोध में मुखरता के साथ बोलते नजर आते है।
वही हेमंत सरकार में सहयोगी दल के तौर पर सरकार में शामिल कांग्रेस ने भाषा विवाद का ठीकरा भाजपा और आजसू पर फोड़ते हुवा कहा कि कांग्रेस की सोच सबका साथ सबका विकास की रही है।भाषा विवाद को हवा देने से बचना चाहिए,हालांकि शिक्षा मंत्री के बयान पर कांग्रेस गेंद मुख्यमंत्री पर फेकती हुई नजर आती है।
वही झारखंड में भाषा विवाद के इस मुद्दे पर राजद सुप्रीमो लालू यादव की भी इंट्री हो गई है। भाषा विवाद पर राजद सुप्रीमो लालू यादव ने भी अपना पक्ष रखा है।लालू यादव ने कहा कि भोजपुरी और मगही का विरोध गलत विरोध है। जो इसका विरोध कर रहा है गलत कर रहा है। विरोध करने वालों का राजद भी विरोध करेगा। लालू यादव से पूछा गया कि झारखंड सरकार के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ही बोकारो में इसका विरोध कर रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों की बातों में कोई दम नहीं है। हम उनका विरोध करते हैं। भोजपुरी समाज डरता नहीं है।
अब आपको बताते है कि क्या है झारखंड का भाष विवाद।दरअसल झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा ली जाने वाली मैट्रिक और इंटर स्तर की प्रतियोगिता परीक्षाओं में उर्दू, भोजपुरी, मगही, अंगिका, बांग्ला और उड़िया भाषा काे क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल किया गया है। सभी 24 जिलाें में उर्दू, 11 में बांग्ला, छह में मगही, पांच में अंगिका, चार में भोजपुरी और तीन जिलाें में उड़िया भाषा इस सूची में है। इसके बाद से ही राज्य में भाषा विवाद ने तूल पकड़ लिया है।और यही वजह है कि जगह-जगह आंदोलन हाे रहे हैं। जनभावनाओं से जुड़े इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हाे गई है। तर्क दिया जा रहा है कि इससे बाहरी युवाओं काे नौकरी मिल जाएगी और स्थानीय युवा इससे वंचित हाे जाएंगे।

