डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर :चांडिल स्थित ‘बिहार स्पंज आयरन लिमिटेड’ में एक बार फिर सन्नाटा पसर गया है। कंपनी प्रबंधन और वनराज स्टील के बीच किराए को लेकर ठन गई है, जिसका खामियाजा अब सैकड़ों परिवार भुगत रहे हैं।
13 साल में दूसरी बार लगा ‘ब्रेक’
चांडिल के हुमिद में स्थित इस प्लांट का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2013 में बंद होने के बाद, इसे बड़ी उम्मीदों के साथ जनवरी 2022 में फिर से शुरू किया गया था। लेकिन महज 3 साल के भीतर एक बार फिर यहां ताला लटक गया है। शुक्रवार को प्लांट की बची हुई दो इकाइयों (किल्न) में भी उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया।
क्या है विवाद की जड़?
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला किराए के विवाद से जुड़ा है।
वनराज स्टील प्राइवेट लिमिटेड साल 2022 से इस प्लांट को किराए पर लेकर चला रही थी। कंपनी को हर महीने 2 करोड़ रुपये किराए के तौर पर देने थे।
हाल ही में वनराज स्टील ने इस किराए को घटाकर 1 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा था। बताया जा रहा है कि बीएसआईएल (BSIL) के ‘मोदी ग्रुप’ ने इस कटौती पर सहमति नहीं जताई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और अंततः संचालन रोक दिया गया।
दांव पर लगा 450 परिवारों का भविष्य
प्लांट बंद होने से सीधे तौर पर 450 से अधिक स्थायी श्रमिक प्रभावित हुए हैं। वहीं, अगर अप्रत्यक्ष रोजगार (ट्रांसपोर्ट, स्थानीय दुकानें और वेंडर) को जोड़ लिया जाए, तो 1000 से ज्यादा लोगों की जेब पर इसकी मार पड़ी है। स्थानीय व्यापारियों और मजदूरों में इस अनिश्चितता को लेकर भारी रोष और हताशा है।
आज की बैठक पर टिकी हैं निगाहें
इस संकट का समाधान निकालने के लिए आज (शनिवार) चांडिल गेस्ट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। ’पांच ग्राम विस्थापित समिति’ के सचिव आशुतोष बेसरा ने बताया कि इसमें स्थानीय विधायक भी शामिल होंगे।
मजदूरों का करीब 3 करोड़ रुपये का वेतन बकाया है। समिति का स्पष्ट स्टैंड है कि कंपनी कोई भी चलाए, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार मिलना चाहिए और उनके हक का पैसा नहीं रुकना चाहिए।

