अहिंसा और सत्य का संदेश लेकर आई महावीर जयंती, देशभर में मनाया जा रहा 2625वां जन्म कल्याणक

KK Sagar
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का 2625वां जन्म कल्याणक महोत्सव आज 31 मार्च 2026, मंगलवार को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व जैन समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, जिसमें भगवान महावीर के उपदेशों को याद करते हुए अहिंसा, सत्य और करुणा का संदेश फैलाया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान महावीर का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह तिथि 30 मार्च सुबह 07:09 बजे से शुरू होकर 31 मार्च सुबह 06:56 बजे तक रही, जिसके चलते आज महावीर जयंती मनाना विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। हालांकि, कुछ स्थानों पर 30 मार्च को भी यह पर्व मनाया गया।

🌼 पूजा-अर्चना और शोभायात्राओं का आयोजन

महावीर जयंती के अवसर पर सुबह-सुबह प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए भगवान महावीर के उपदेशों का प्रचार किया। इसके बाद मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए गए।

शहरों में भव्य शोभायात्राएं और रथ यात्रा भी निकाली गईं, जिनमें भगवान महावीर की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और “अहिंसा परमो धर्मः” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया गया।

🕊️ अहिंसा और करुणा का संदेश

भगवान महावीर ने अपने जीवन में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे पंच महाव्रतों का संदेश दिया। उन्होंने “जीओ और जीने दो” का सिद्धांत देकर मानवता को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाया।

कहा जाता है कि उन्होंने कम उम्र में ही सांसारिक जीवन त्याग दिया और करीब साढ़े बारह वर्षों तक कठोर तपस्या के बाद ज्ञान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने अपना जीवन समाज के कल्याण और जैन धर्म के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया।

📿 दान-पुण्य और संकल्प का दिन

इस दिन जैन समाज के लोग विशेष रूप से दान-पुण्य करते हैं और जीवों के प्रति दया भाव रखने का संकल्प लेते हैं। कई स्थानों पर गरीबों को भोजन, वस्त्र और अन्य जरूरी सामान वितरित किए जाते हैं।

✨ महावीर स्वामी के प्रमुख उपदेश

सभी जीवों के प्रति दया रखना सबसे बड़ा धर्म है

सत्य के मार्ग पर चलना ही सच्ची सफलता है

हर आत्मा में मोक्ष पाने की शक्ति होती है

मोह और लोभ से दूर रहना चाहिए

इंद्रियों पर नियंत्रण और ब्रह्मचर्य का पालन जरूरी है

मन की शांति ही सबसे बड़ा सुख है

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