चुनावी माहौल के बीच आसनसोल का एडीडीए ग्राउंड शनिवार को उस वक्त राजनीतिक उबाल का केंद्र बन गया, जब तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर एक के बाद एक तीखे प्रहार किए।
मुख्यमंत्री ने कोयला चोरी के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ कहा कि जब कोयला खदानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र सरकार और Central Industrial Security Force (CISF) के पास है, तो तृणमूल कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करना सरासर राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता और मंत्री “हर महीने करोड़ों की उगाही” में लिप्त हैं।
रानीगंज में बढ़ती धंसान की समस्या को लेकर उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि यह संकट गलत नीतियों का नतीजा है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि “ऊंचे पदों पर बैठकर जनता को सिर्फ भ्रम और धोखे में रखा जा रहा है।”
ममता बनर्जी ने 2021 से पहले किए गए चाय बागान और डनलप अधिग्रहण के वादों की याद दिलाते हुए कहा कि वे आज भी अधूरे हैं। हिंदी में दिए गए अपने संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा कि “मेरी आवाज दिल्ली तक पहुंचनी चाहिए।”
उन्होंने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बंगालियों के साथ अन्याय हो रहा है, जबकि बंगाल में करीब डेढ़ करोड़ प्रवासी श्रमिक सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।
भाजपा के चुनावी वादों पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने बैंक खातों में 15 लाख रुपये और हर साल 2 करोड़ नौकरियों के वादे को “सिर्फ जुमला” करार दिया।
सभा के अंत में उन्होंने विकास का विजन रखते हुए कहा कि आसनसोल-रानीगंज क्षेत्र को जल्द ही एक बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही डेउचा पचामी परियोजना के जरिए एक लाख युवाओं को रोजगार मिलने का दावा भी किया।
अपने तेजतर्रार और आक्रामक भाषण से ममता बनर्जी ने एक बार फिर साफ कर दिया कि चुनावी जंग में तृणमूल कांग्रेस पूरी ताकत के साथ मैदान में है और भाजपा को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार है। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बर्दवान जिले के सभी प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करने का आह्वान भी किया।

