झारखंड की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राज्य की वित्तीय हालत पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिये सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण और जमीनी हकीकत के बीच भारी अंतर बताया है।
📊 “आर्थिक सर्वे कागज़ों में संतुलित, ज़मीनी सच्चाई चिंताजनक”
बाबूलाल मरांडी ने अपने ट्वीट में कहा है कि राज्य सरकार द्वारा पेश किया गया आर्थिक सर्वे भले ही कागज़ों पर संतुलित नजर आता हो, लेकिन आंकड़ों की बाजीगरी से सच्चाई को ज्यादा दिन तक नहीं छिपाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की वित्तीय हालत दिन-ब-दिन और ज्यादा चिंताजनक होती जा रही है, जिसका असर आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिख रहा है।
💸 महंगाई, बेरोज़गारी और वेतन संकट से जूझ रही जनता
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार बजट पेश करने की तैयारी में है, लेकिन राज्य की जनता महंगाई, बेरोज़गारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से त्रस्त है। हालात इतने खराब हैं कि शिक्षा जारी रखने के लिए एक भाई को अपनी बहन की शादी के गहने बेचने पड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा और ठेकेदारों का भुगतान लंबित होने के कारण विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं।
🏥 स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह चरमराई हुई बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल बदहाल स्थिति में हैं और बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। एम्बुलेंस की कमी के चलते ग्रामीण इलाकों में बहंगी और खटिया ही मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का सहारा बन रही है। उन्होंने उन घटनाओं का भी ज़िक्र किया, जहां एम्बुलेंस न मिलने के कारण एक गरीब पिता को अपने मासूम बच्चे का शव झोले में ले जाना पड़ा।
🚓 कानून-व्यवस्था और परिवहन व्यवस्था पर भी निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने कानून-व्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी कबाड़ हो चुके वाहनों से पेट्रोलिंग करने को मजबूर हैं। वहीं राजधानी रांची से लेकर धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह जैसे बड़े शहरों में भी आम जनता के लिए समुचित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं है। सिटी बस योजना केवल फाइलों तक ही सीमित नजर आ रही है।
🏛️ बजट से जनता को निराशा की आशंका
अपने ट्वीट के अंत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार के मौजूदा क्रियाकलापों को देखकर यही प्रतीत होता है कि आने वाले बजट में भी आम जनता को निराशा ही हाथ लगेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह कागज़ी दावों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत पर ध्यान दे।

