आधी रात का संग्राम: थाने में 3 घंटे तक जनता का गर्जना, सवालों के घेरे में जमशेदपुर पुलिस

Manju
By Manju
3 Min Read

डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : जमशेदपुर के गोलमुरी में फल व्यवसायी कन्हैया यादव की हत्या ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला महज एक अपराध नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कथित अनदेखी का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।

पुलिस की भूमिका पर सवाल और जनता का आक्रोश
घटना के बाद गोलमुरी थाने में करीब तीन घंटे तक भारी हंगामा हुआ। स्थानीय लोगों और युवा यादव समाज का सबसे बड़ा आरोप यह है कि कन्हैया यादव ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पहले ही पुलिस को लिखित शिकायत दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी रेकी की जा रही है और उन्हें लगातार धमकी भरे संदेश और कॉल मिल रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि हत्या वाली जगह गोलमुरी थाना और डीएसपी कार्यालय से महज कुछ ही दूरी पर है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर पुलिस ने व्यवसायी की शिकायत पर समय रहते कार्रवाई की होती, तो यह अनहोनी टाली जा सकती थी। देर रात तक चले इस हंगामे के बाद पुलिस अधिकारियों ने 24 घंटे के भीतर अपराधियों को पकड़ने का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया।

जांच के मुख्य बिंदु और संभावित रंजिश
पुलिस फिलहाल इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए कई पहलुओं पर काम कर रही है।

चुनावी विवाद: जांच में सामने आया है कि टिनप्लेट काली मंदिर कमेटी की अध्यक्षता को लेकर साल 2016 से विवाद चल रहा था। कन्हैया यादव के अध्यक्ष बनने के बाद से ही वर्चस्व की जंग शुरू हुई थी, जिसमें बिल्ला पाठक और विक्की सिंह उर्फ कुंडी के साथ उनकी अदावत की बात कही जा रही है।

व्यापारिक प्रतिस्पर्धा: पुलिस यह भी देख रही है कि क्या फल व्यवसाय में किसी प्रतिद्वंद्वी ने इस घटना को अंजाम दिया है।

रंगदारी और पुराना विवाद: रंगदारी या किसी अन्य पुराने आपसी रंजिश के एंगल से भी पूछताछ जारी है।

ताजा कार्रवाई
बुधवार की देर रात पुलिस ने विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर दो संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है। फिलहाल उनसे गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा, लेकिन इस घटना ने शहर की कानून-व्यवस्था और ‘सक्रिय पुलिसिंग’ के दावों की पोल खोल दी है।

Share This Article