धनबाद में नेशनल लोक अदालत का जलवा : लाखों विवादों का निपटारा, अरबों की रिकवरी

KK Sagar
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धनबाद : झारखंड के धनबाद जिले में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन बड़े ही सफल और ऐतिहासिक तरीके से संपन्न हुआ। नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) के निर्देशानुसार वर्ष 2025 की तीसरी नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश त्रिलोक सिंह चौहान ने ऑनलाइन रांची से किया।

धनबाद के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) के चेयरमैन वीरेंद्र कुमार तिवारी ने धनबाद में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अब नेशनल लोक अदालत किसी परिचय की मोहताज नहीं रही। यह आम लोगों के जीवन का हिस्सा और आदत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत संविधान में निहित सामाजिक, आर्थिक और सस्ता-सुलभ न्याय की अवधारणा को पूरा करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

तीन माह पर आयोजित होती है नेशनल लोक अदालत

नवंबर 2013 से पूरे देश में हर तीन माह में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य है कि आम लोग महीनों तक कोर्ट का चक्कर लगाने और खर्च से बच सकें। इससे लोगों को मानसिक शांति मिलती है और आपसी प्रेम एवं सौहार्द भी कायम रहता है।

प्रशासन और न्यायपालिका का संयुक्त प्रयास

डीडीसी धनबाद सादात अनवर ने कहा कि लोक अदालत पूरी तरह से आम आदमी के हित के लिए लगाई जाती है। जिला प्रशासन हर वक्त डालसा के साथ मिलकर समाज की सेवा में तत्पर है।
धनबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने कहा कि डालसा निरंतर आम लोगों के हित में काम कर रहा है। वहीं, धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे मुकदमों का निष्पादन तेज़ी से होता है और वादकारियों को कानूनी पचड़ों से छुटकारा मिलता है।

अरबों की रिकवरी और लाखों मामलों का निपटारा

अवर न्यायाधीश सह सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार मयंक तुषार टोपनो ने जानकारी दी कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आदेश पर कुल 13 बेंच का गठन किया गया था। इन बेंचों ने दोपहर 2 बजे तक ही 2,91,012 विवादों का निपटारा कर 12 अरब 44 करोड़ 3 लाख 22 हजार 704 रुपए की रिकवरी सुनिश्चित की।
इनमें 37,130 मामले ऐसे थे जो पहले से अदालतों में लंबित थे, जबकि 2,53,882 प्री-लिटिगेशन (अदालत में जाने से पूर्व) के मामले निपटाए गए। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि शाम तक यह आंकड़ा और अधिक बढ़ेगा।

न्यायिक पदाधिकारी और अधिवक्ताओं की मौजूदगी

इस अवसर पर कई वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय सुभाष, लेबर जज रमाकांत मिश्रा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरती माला, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पी.एस. घोष, सिविल जज एंजेलिना जॉन, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी अभिजीत पांडे, रेलवे मजिस्ट्रेट मनोज कुमार, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी ऋषि कुमार, रजिस्ट्रार आई.ज़ेड. खान, स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष पीयूष कुमार, सर्टिफिकेट ऑफिसर रवींद्रनाथ ठाकुर, जिला उपभोक्ता फोरम की सदस्य शिप्रा सहित डालसा पैनल अधिवक्ता, लीगल एड डिफेंस काउंसिल टीम और विभिन्न विभागों के पदाधिकारी शामिल थे।

उद्देश्य : न्याय सबके लिए

नेशनल लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य समाज में प्रेम, शांति, समृद्धि और समरसता बनाए रखना है। वादकारियों, न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और प्रशासनिक सहयोग से ही यह संभव हो पाया है।

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