पटना के चर्चित नीट (NEET) छात्रा मौत मामले में एक नया ट्विस्ट देखा जा रहा है। पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की नाबालिग छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच जारी है। हालांकि, इस बीच सीबीआई की दिल्ली टीम ने अब पूरे मामले की जांच की निगरानी संभाल ली है।
दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी पटना में कैंप कर रहे
सीबीआई एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) दिल्ली के एसपी जांच की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, एसीबी दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी पटना में कैंप कर पूरी जांच प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि जांच टीम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। केस की जांच पदाधिकारी विभा कुमारी ही हैं, जिनके काम की मॉनिटरिंग एसीबी के एसपी करेंगे।
जांच की धीमी रफ्तार और गंभीरता पर कड़ी नाराजगी
यह फैसला तब लिया गया, जब पटना सिविल कोर्ट के पॉक्सो कोर्ट ने जांच की धीमी रफ्तार और गंभीरता को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि इतने गंभीर मामले में भी सीबीआई सुस्त है। अगर समय पर ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए, तो यह न्याय के साथ खिलवाड़ होगा। जब फॉरेंसिक रिपोर्ट में यौन हिंसा के प्रमाण थे, तो सीबीआई ने पॉक्सो एक्ट की धाराएं क्यों नहीं लगाईं? कोर्ट ने सीबीआई से पूछा है कि डेढ़ महीने की लंबी जांच में आखिर क्या हासिल हुआ? सीसीटीवी फुटेज और सबूत में अब तक क्या मिला है?
30 मार्च को मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट
अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह 30 मार्च को अद्यतन जांच रिपोर्ट पेश करे। इस रिपोर्ट में अब तक की जांच, जुटाए गए सबूत और आगे की कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा। कोर्ट की निगरानी में चल रही इस जांच से उम्मीद की जा रही है कि मामले के कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आएंगे।
सीबीआई की सक्रियता पर भी सवाल
बता दें कि पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में जहानाबाद की रहने वाली छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआत में इस मामले की जांच बिहार पुलिस कर रही थी, लेकिन बढ़ते दबाव और विरोध के बाद केस को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बावजूद जांच की दिशा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। यहां तक कि कोर्ट ने भी पूछा कि शुरुआती 20 दिनों तक सीबीआई इस मामले में सक्रिय क्यों नहीं दिखी। छात्रा की मौत को लेकर जांच एजेंसी अब हत्या और यौन उत्पीड़न दोनों पहलुओं पर गहराई से पड़ताल कर रही है। खास बात यह रही कि शुरुआत में पॉक्सो एक्ट नहीं लगाया गया था, जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। इसके बाद ही इस गंभीर धारा को केस में जोड़ा गया।

