डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: झारखंड के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक, टाटानगर रेलवे स्टेशन अब सुरक्षा के मामले में और भी हाई-टेक होने जा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए रेलवे यहां फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) लगाने की तैयारी पूरी कर चुका है। इस तकनीक के आने के बाद स्टेशन परिसर में घूम रहे अपराधियों और संदिग्धों की पहचान करना बेहद आसान हो जाएगा।
क्या है पूरी योजना?
स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को डिजिटल रूप से मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इंस्पेक्शन पूरा: इस सिस्टम को लगाने से पहले का जरूरी इंस्पेक्शन (निरीक्षण) कार्य संपन्न हो चुका है।
सफल ट्रायल: देश के कई अन्य प्रमुख स्टेशनों पर इसका प्रयोग सफल रहा है, जिसके बाद अब इसे टाटानगर में लागू किया जा रहा है।
CCTV नेटवर्क: वर्तमान में टाटानगर स्टेशन के अंदर लगभग 131 CCTV कैमरे काम कर रहे हैं, जिनकी निगरानी आरपीएफ (RPF) द्वारा की जाती है।
अपराधियों के साथ-साथ ‘गुमशुदा’ लोगों की भी होगी तलाश
आरपीएफ के प्रभारी राकेश मोहन ने बताया कि फेस रिकग्निशन सिस्टम के लिए ट्रायल की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसे चालू कर दिया जाएगा।
सिस्टम के मुख्य फायदे
अपराधियों की पहचान: डेटाबेस में मौजूद अपराधियों का चेहरा कैमरे में आते ही सिस्टम अलर्ट जारी कर देगा।
गुमशुदा लोगों की खोज: यह तकनीक उन लोगों को ढूंढने में भी मददगार साबित होगी जो लापता हैं या घर से भागकर स्टेशन पहुँचते हैं।
सुरक्षा का घेरा: स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर प्लेटफॉर्म तक हर गतिविधि पर पैनी नजर रहेगी।
डिजिटल निगरानी में टाटानगर
आपको बता दें कि स्टेशन परिसर के बाहर और आसपास भी बड़ी संख्या में कैमरे लगे हैं, जो कुल कैमरों का लगभग 10 प्रतिशत हैं। इन सभी को नए सिस्टम से जोड़ने के बाद टाटानगर स्टेशन एक अभेद्य किले में तब्दील हो जाएगा।

