पटना में निजी स्कूलों की मनमानी अब नहीं चलेगी। प्राइवेट स्कूलों की ओर से मनमाने तरीके से फीस वसूलने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। जिलाधिकारी डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने स्पष्ट किया है कि एडमिशन के बाद हर साल री-एडमिशन (पुनर्नामांकन) के नाम पर राशि वसूलना पूरी तरह गलत है। नए नियम के तहत स्कूल हर साल फीस में अधिकतम 7 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी कर सकते हैं।
7% से अधिक शुल्क वृद्धि नहीं कर सकेंगे
जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल पिछले शैक्षणिक वर्ष की तुलना में वर्तमान सत्र में अधिकतम 7% से अधिक शुल्क वृद्धि नहीं कर सकता है। यदि कोई स्कूल इससे अधिक वृद्धि करना चाहता है, तो उसे ‘शुल्क विनियमन समिति’ से मंजूरी लेनी अनिवार्य होगी।
सभी प्रकार के शुल्कों का ब्यौरा सार्वजनिक करना होगा
यही नहीं, सभी स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सभी प्रकार के शुल्कों का ब्यौरा सार्वजनिक करना होगा। प्रशासन के अनुसार, कई स्कूलों पर प्रवेश शुल्क, ट्यूशन फीस, विकास शुल्क और अन्य चार्जेज मनमाने तरीके से लेने के आरोप लगे हैं। अब स्कूलों को सभी तरह की फीस की पूरी जानकारी अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी, ताकि अभिभावकों को पारदर्शिता मिल सके।
शुल्क वृद्धि के 30 दिन के अंदर करें शिकायत
डीएम ने कहा कि अभिभावक शुल्क वृद्धि होने के 30 दिन के अंदर प्रमंडलीय आयुक्त के कार्यालय में शिकायत करा सकेंगे। शुल्क विनियमन समिति इसकी जांच करेगी। मामला सत्य पाए जाने पर सिविल कोर्ट को निहित शक्तियों के तहत इस मामले की सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा विद्यालयों को हर वर्ष का लेखा संधारण करना होगा। अधिनियम का उल्लंघन करने पर पहली बार एक लाख तो अगली बार दो लाख का जुर्माना लगाया जाएगा।
यूनिफॉर्म-किताबें अब कहीं से भी खरीदें
निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को किसी खास दुकान से ही किताबें, यूनिफॉर्म, जूते या कॉपियां खरीदने के लिए मजबूर करने की शिकायतों पर डीएम ने सख्त हिदायत दी है। अभिभावक अपनी पसंद के अनुसार कहीं से भी इन सामानों की खरीद करने के लिए स्वतंत्र होंगे। यदि कोई विद्यालय किसी विशेष स्थान से खरीद के लिए बाध्य करता है, तो वह प्रशासनिक दंड का भागी होगा। स्कूल को अपनी पाठ्य पुस्तकों और ड्रेस की विशिष्टताओं की सूची नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी।

