डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: सरकारी अस्पतालों में जांच के लिए घंटों लाइन में लगने का दौर अब एमजीएम अस्पताल में खत्म होने जा रहा है। मरीजों की भारी भीड़ और अफरा-तफरी को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने एक बड़ा बदलाव किया है। अब मरीजों को एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और दवा काउंटर पर अपनी बारी के लिए धक्के नहीं खाने पड़ेंगे, बल्कि टोकन सिस्टम के जरिए उनका काम आसान होगा।
क्या है नई व्यवस्था?
अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. जुझार मांझी ने बताया कि अस्पताल के एक्सरे और अल्ट्रासाउंड विभाग में टोकन सिस्टम लागू कर दिया गया है।
रजिस्टर एंट्री ही बनेगा आधार: जैसे ही मरीज का नाम रजिस्टर में दर्ज होगा, उन्हें एक सीरियल नंबर दिया जाएगा।
बारी का इंतजार: यही सीरियल नंबर मरीज का टोकन नंबर होगा। इसी नंबर के आधार पर मरीजों को जांच के लिए बुलाया जाएगा।
फार्मेसी पर भी राहत: केवल जांच ही नहीं, बल्कि दवा काउंटर (फार्मेसी) पर भी यह सिस्टम लागू किया गया है ताकि दवा लेने वाले मरीजों को सुव्यवस्थित तरीके से मदद मिल सके।
इमरजेंसी के लिए ‘पोर्टेबल एक्सरे’ की सुविधा
गंभीर मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एमजीएम के इमरजेंसी वार्ड में ही एक्सरे की सुविधा शुरू की गई है। इसके लिए ‘पोर्टेबल एक्सरे’ मशीन लगाई गई है। इससे अब गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों को छाती, पेट या पैर के एक्सरे के लिए दूसरे विभाग में ले जाने की जरूरत नहीं होगी। इमरजेंसी में ही उनकी जांच तुरंत संभव हो सकेगी।
मरीजों को क्या होगा फायदा?
समय की बचत: टोकन नंबर होने से मरीजों को पता होगा कि उनकी बारी कब आएगी।
भीड़ से निजात: काउंटरों पर होने वाली धक्का-मुक्की और अव्यवस्था कम होगी।
पारदर्शिता: ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर काम होगा, जिससे किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।
एमजीएम अस्पताल का यह कदम उन हजारों मरीजों के लिए राहत भरा है जो दूर-दराज से इलाज के लिए यहां आते हैं। तकनीकी सुधार और टोकन सिस्टम से न केवल मरीजों को सहूलियत होगी, बल्कि डॉक्टरों और स्टाफ के लिए भी काम करना आसान हो जाएगा।

